नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने वतन ढाका लौटने का ऐलान किया है। भारत आने के दो साल बाद उन्होंने पहली बार अपने मुल्क के लोगों को संबोधित किया और भावुक होते हुए कहा कि वे दो साल से अपने देश को पीड़ित होते देख रही हैं। उन्होंने कहा कि यह वो बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपने जीवन का बलिदान किया। वर्चुअल तरीके से दिए गए गए अपने भाषण में उन्होंने कहा कि वे इस साल दिसंबर में अपने देश लौट सकती हैं।
करीब 25 मिनट के अपने भाषण में शेख हसीना ने कहा है बांग्लादेश के नए शासक शेख मुजीब उर रहमान की विरासत मिटा देना चाहते हैं। भाषण के दौरान उनका कैमरा बंद रहा। यानी उनकी सिर्फ आवाज सुनी गई। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया। खबर है कि उनके संबोधन के दौरान बांग्लादेश के क्रिकेटर शकीबुल हसन भी मौजूद थे। इस वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट क्लब ऑफ साउथ एशिया की ओर से किया गया था। गौरतलब है कि दो साल पहले पांच अगस्त को ही बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ था, जिसके बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं।
बहरहाल, शेख हसीना ने अपने भाषण में कहा, ‘मुझे पता है कि वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मार भी सकते हैं, फिर भी मैं बांग्लादेश वापस जाउंगी। लोगों का समर्थन मेरे लिए बहुत जरूरी है’। उन्होंने आगे कहा, ‘मौत की सजा, झूठे मुकदमे और दिखावटी सुनवाई मुझे डरा नहीं सकती। मेरे खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक मकसद से प्रेरित है’।
हसीना ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा था। प्रदर्शनकारियों के प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने पर उनके पास वहां से निकलने के लिए सिर्फ 30 से 40 मिनट का समय था। तब उन्हें नहीं पता था कि वे देश छोड़ कर जा रही हैं। वह अपने पैतृक गांव तुंगीपाड़ा जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन हालात ऐसे बने कि देश छोड़ना पड़ा। गौरतलब है कि उनके भारत आने के बाद से बांग्लादेश उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
बहरहाल, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने भारत को मित्र देश बताते हुए कहा कि वह हमेशा बांग्लादेश का अच्छा दोस्त रहा है। उन्होंने कहा, ‘जब भी बांग्लादेश किसी मुश्किल हालात में होता है, भारत हमेशा उसके साथ खड़ा रहता है, चाहे वह 1971 हो, 1975 हो या आज का समय’। हसीना ने कहा कि सरकारों के बीच के संबंध अलग हो सकते हैं, लेकिन भारत हमेशा से एक अच्छा दोस्त रहा है और मुझे पता है कि वह आगे भी ऐसा ही रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत भले ही मित्र देश है लेकिन उन्हें अपने लोगों के पास जाना है।
