बेंगलुरू। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन के बाद अब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सनातन को लेकर विवादित बयान दिया है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा है कि उनको सनातनियों से दूर रहना चाहिए। सिद्धारमैया ने लोगों से संगत ठीक रहने की नसीहत देते हुए कहा कि लोगों को सनातनियों के साथ नहीं रहना चाहिए। गौरतलब है कि उदयनिधि स्टालिन ने सनातन को एक बिमारी की तरह बताया था।
गौरतलब है कि पिछले दिनों सिद्धारमैया ने बेटे ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पर पाबंदी लगाने की बात कही थी। उसके बाद सिद्धारमैया ने सरकारी जमीन पर संघ की शाखा लगाने पर रोक लगाई और जांच के आदेश दिए। उसके बाद उन्होंने सनातन विरोध का नया एजेंडा उठाया है। सिद्धारमैया ने शनिवार को कहा कि लोगों को सनातनियों की संगत से बचना चाहिए और आरएसएस से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि उन्होंने इतिहास में हमेशा डॉ. भीमराव अंबेडकर और उनके बनाए संविधान का विरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने मैसूर विश्वविद्यालय के रजत जयंती समारोह में ज्ञान दर्शन भवन का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘अपनी संगति सही रखिए। समाज के भले के लिए काम करने वालों के साथ रहिए, न कि उन सनातनियों के साथ जो सामाजिक बदलाव का विरोध करते हैं’। मुख्यमंत्री ने आरएसएस पर आरोप लगाया कि वह अब भी अंबेडकर के संविधान का विरोध करता है और लोगों को गुमराह कर रहा है।
सिद्धारमैया ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘यह घटना दिखाती है कि सनातनी और कट्टरपंथी सोच आज भी समाज में मौजूद है। इस घटना की सिर्फ दलितों को नहीं, बल्कि हर भारतीय को निंदा करनी चाहिए। तभी कहा जा सकता है कि समाज बदलाव के रास्ते पर है’। सिद्धारमैया ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने दुनिया के कई देशों के संविधान पढ़े और उनमें से भारत के लिए सबसे अच्छा संविधान बनाया।
अंबेडकर की तारीफ करते हुए सिद्धारमैया ने अपने बारे में कहा कि वे भगवान बुद्ध, बसवेश्वर और अंबेडकर के विचारों में भरोसा करते हैं और चाहते हैं कि समाज में समझदारी और वैज्ञानिक सोच बढ़े। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अंबेडकर एक ऐसे महान व्यक्ति थे जिन्होंने अपने ज्ञान से समाज में बड़ा बदलाव लाया’।
