नई दिल्ली। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग चलाया। विपक्ष की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश के खिलाफ छह आरोपों के साथ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया। एक दिन की देरी से हुए इस जन महाभियोग की कार्यवाही की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने दी। प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब राहुल गांधी ने दिया। विपक्ष न न सिर्फ ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की, बल्कि उन्हें जेल भेजने की भी मांग की। इस कार्यवाही में 19 पार्टियों के नेता और कुछ ऐसे लोग भी शामिल हुए, जिनके नाम एसआईआर में कट गए थे।
इससे पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोप लगाए। विपक्ष ने पहला आरोप चुनाव चुराने की साजिश रचने का लगाया। दूसरा आरोप एसआईआर के जरिए 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम काटने का लगाया। खड़गे की ओर से पेश आरोपपत्र में तीसरा आरोप संसद की मंजूरी के बगैर फॉर्म छह में बदलाव का था। विपक्ष का चौथा आरोप यह था कि ईसीओएमनेट के जरिए मतदाता सूची पर कब्जा किया गया यानी उस पर पूरा कंट्रोल किया गया। पांचवां आरोप था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने बाकी दो आयुक्तों की अनदेखी करके मनमाने तरीके से फैसला किया। छठा और अंतिम आरोप था कि ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हिसाब से काम किया।
यह आरोपपत्र पेश करने के बाद खड़गे ने कहा, ‘हमारी मांग है सीईसी को तत्काल पद से हटाकर 2023 का कानून रद़्द हो। एसआईआर को रोका जाए’। खड़गे ने 2023 में कानून लाकर चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट देने का भी किया और कहा, ‘यह साफ है कि उन्हें मिला कानूनन जीवनदान, पीएम मोदी और शाह ने दिया है, जो दिसंबर 2023 में दिया गया। यह अपराध है। जो देश के संविधान के खिलाफ है। इसलिए उन्हें पद से तुरंत हटाया जाए’।
खड़गे ने कहा, ‘आखिर में देश की 60 प्रतिशत जनता के प्रतिनिधि के तौर पर ‘इंडिया’ ब्लॉक यह मांग करता है कि उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए’। खड़गे ने कहा, ‘जब चोरी पकड़ी गई तो एसआईआर का ऐलान कर दिया गया। मृतकों को वोटर लिस्ट में रखने की पैरवी कोई नहीं कर रहा है। आप हटाएं, हमने यह कभी नहीं कहा। हम यही चाहते हैं कि आप आंकड़े दो’। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी 40 लाख नए नाम जोड़े गए जिससे नतीजा पलट गया’।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘मोदी ने सत्ता पर काबिज रहने के लिए हर साजिश रची। चुनावी बॉन्ड, सांसद चोरी और अब वोट चोरी, हमारे पास सैकड़ों उदाहरण है’। उन्होंने कहा, ‘विपक्ष के 145 सांसदों को सस्पेंड करके यह बिल पास किया गया। जो देश हित में काम कर रहे थे, उन्हें संसद से बाहर करके यह कानून पास करवाया गया। यह कानून चुनाव आयुक्त को ऐसी सुरक्षा देता है जो राष्ट्रपति को भी नहीं है’।
