नई दिल्ली। 22 हजार करोड़ का लोन साढ़े छह करोड़ रुपए में निपटाने के फैसले पर रोक लग गई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी ने मंगलवार को एस्सल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन के मामले में दिए अपने ही फैसले पर रोक लगा दी है। एनसीएलटी ने मामले की फिर से सुनवाई का फैसला किया है। साथ ही अदालत ने सुभाष चंद्रा के अपनी संपत्ति बेचने पर रोक लगा दी है।
रिटायर जज जस्टिस अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल के नेतृत्व वाली एनसीएलटी की पांच सदस्यों वाली बेंच ने इस पर मंगलवार को विशेष सुनवाई की और कहा कि 25 अगस्त के फैसले पर कोई स्पष्ट बहुमत वाली राय नहीं बन पाई है। बेंच ने इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा, एनसीएलटी ने कर्ज देने वालों यानी क्रेडिटर्स की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता की अपील पर सुभाष चंद्रा को अपनी प्रॉपर्टी को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किसी और को ट्रांसफर करने या बेचने से भी रोक दिया है।
एनसीएलटी ने अपने फैसले में कहा, ‘हम यह भी निर्देश देते हैं कि गारंटर अपनी प्रॉपर्टी को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किसी और को ट्रांसफर या बेच नहीं सकता है’। गौरतलब है कि पांच सदस्यों वाली इस बेंच में न्यायिक सदस्य बाचू वेंकट बालारा दास और महेंद्र खंडेलवाल और टेक्निकल सदस्य अतुल चतुर्वेदी और रवींद्र चतुर्वेदी शामिल थे। इससे पहले एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की 22 हजार करोड़ रुपए कर्ज की निजी गारंटी को साढ़े छह करोड़ में निपटाने का फैसला सुनाया था।
