नई दिल्ली। नेशनल कौंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के समाज विज्ञान की किताब में इमरजेंसी और एसआईआर का अध्याय जोड़ा है। किताब से संविधान की प्रस्तावना हटा दी गई है और समाजवादी व धर्मनिरपेक्ष शब्द भी हटा दिया गया है। गौरतलब है कि इंदिरा गांधी की सरकार ने इमरजेंसी के समय संविधान के 42वें संशोधन के जरिए इन दोनों शब्दों को संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया था।
बहरहाल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बारे में इस किताब में बताया गया है कि इसका मुख्य काम मतदाता सूची को अपडेट करना, मतदाताओं का सत्यापन करना और मतदाताओं की सूची में गड़बड़ियों को दूर करना है। इस अध्याय में छात्रों को यह भी समझाया जाएगा कि मतदाता सूची का निरीक्षण करने से चुनावी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
किताब को लेकर आई जानकारी के मुताबिक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इसमें संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के माध्यम से की गई है। इसमें संप्रभुता, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य जैसे प्रस्तावनें में लिखे गए शब्दों के बारे में नहीं बताया गया है। नौवीं की किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार, साथ ही गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए।
