तेल अवीव। इजराइल में नई सरकार के गठन की तस्वीर धीरे धीरे साफ होती दिख रही है। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ दो दिन की बातचीत के बाद विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए 56 सांसदों का समर्थन मिल गया है। मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों ने सिफारिश की है। धार्मिक दल यूनाइटेड तोरा जूडिज्म ने किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया है। इस घटनाक्रम के बाद नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
राष्ट्रपति हर्जोग ने सभी दलों से कहा है कि अगर वे देश को दोबारा चुनाव में जाने से बचाना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी कुछ शर्तें और वादे छोड़ने होंगे। दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था। अब सरकार बनाने के लिए अलग-अलग दलों को एक साथ लाने की कोशिश हो रही है। चुनाव के बाद तीन नवंबर को नेतन्याहू के विरोधी चार बड़े नेताओं ने हर्जलिया में बैठक की। इनमें गादी आइजेनकोट, नफ्ताली बेनेट, यायर लापिड और यायर गोलान शामिल थे।
इन नेताओं ने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए मिलकर काम करने और सरकार बनाने की बातचीत तुरंत शुरू करने पर सहमति जताई। बैठक में इन नेताओं ने राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके लिए चार बुनियादी सिद्धांत तय किए गए। इनके सिद्धांत में कहा गया है कि इजराइल एक यहूदी और लोकतांत्रिक देश बना रहेगा। आजादी के समय तय किए गए मूल सिद्धातों के हिसाब से देश चलेगा। देश के हर नागरिक के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य की जाए। इनका चौथा सिद्धांत है, ‘हमास को आतंकवादी संगठन मानकर उसकी सैन्य ताकत खत्म की जाएगी और गाजा से उसका शासन खत्म करने की कोशिश होगी’।
बहरहाल, धार्मिक पार्टी यूनाइटेड तोरा जूडिज्म की डिगेल हतोरा शाखा ने किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करने से इनकार कर दिया। इसके चार सांसद हैं। पार्टी के धार्मिक नेताओं ने यह फैसला लिया। आइजनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करना है। इजराइल की संसद में अरब पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं। इनमें मंसूर अब्बास की राआम पार्टी के पास आठ और जॉइंट लिस्ट के पास 11 सीटें हैं। मंसूर अब्बास की पार्टी ने आइजनकोट का समर्थन किया है।
