नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठ कर वे जैसी भाषा बोलते हैं उसे उचित नहीं कहा जा सकता है। अदालत ने उनकी भाषा को ‘अशोभनीय’ बताया। गौरतलब है कि गुरुवार की सुनवाई में खेड़ा के वकील अभिषेक सिंघवी ने अदालत में अखबार पेश किए थे, जिनमें पवन खेड़ा को लेकर दिया गया सरमा का बयान छपा था। अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसले का ऐलान किया और पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी। असम में खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन विदेशी पासपोर्ट और अमेरिका में 50 हजार करोड़ की कंपनी होने का आरोप लगाया था। पवन खेड़ा ने पांच अप्रैल को दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये आरोप लगाए थे। इसके बाद रिंकी भुइयां सरमा ने उनके खिलाफ गुवाहाटी में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद सात अप्रैल को असम पुलिस ने खेड़ा के दिल्ली स्थित घर पर छापा मारा था।
सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि आरोप प्रत्यारोप राजनीति से प्रभावित लगते हैं। लेकिन पवन खेड़ा को असम पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा और वे बिना अदालत की अनुमति के भारत नहीं छोड़ सकते। कोर्ट के फैसले के बाद जयराम रमेश और अभिषेक सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि 60 पुलिसवालों को खेड़ा के घर पर भेज दिया। भारी संख्या में पुलिस भेजने का कारण सिर्फ डराना और उत्पीड़न करना था।
