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स्कूली छात्राओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश

Ranchi, May 27 (ANI): Ursuline Convent School students in a jubilant mood as they celebrate their results on the declaration of the Jharkhand Academic Council (JAC) metric results, in Ranchi on Tuesday. (ANI Photo)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली छात्राओं के लिए दो बड़े निर्देश दिए हैं। सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को कहा कि देश के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को स्कूल में लड़कियों को मुफ्त में सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि लड़के और लड़कियों के लिए अलग अलग वॉशरूम बनाने होंगे। अदालत ने कहा कि जो स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे, उनकी मान्यता रद्द की जाएगी।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांगों के अनुकूल टॉयलेट बनाए जाएं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे देश में लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में पिछले चार सालों से सुनवाई चल रही थी। इस पर अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया है। सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने 2022 में एक जनहित याचिका लगाई थी।

इस याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अगर स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट नहीं हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 यानी बराबरी के अधिकार का उल्लंघन है। इसी तरह अगर लड़कियों को सैनिटरी पैड नहीं मिलते तो वे लड़कों की तरह बराबरी से पढ़ाई और गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पातीं। अदालत ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन और गरिमा के अधिकार का हिस्सा है। अगर लड़कियों को उचित सुविधा नहीं मिलती तो उनकी गरिमा और निजता प्रभावित होती है।

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