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दलबदल को सुप्रीम कोर्ट ने ‘संवैधानिक पाप’ कहा

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। शिव सेना में विभाजन और नाम व चुनाव चिन्ह आवंटन को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ी टिप्पणी की। अदालत ने दलबदल को संवैधानिक पाप करार दिया। चुनाव चिन्ह विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई की। असल में शिव सेना के उद्धव ठाकरे गुट ने एकनाथ शिंदे गुट को धनुष बाण चुनाव चिन्ह देने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है।

इस पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा, ‘क्या चुनाव चिन्ह की भावना उन लोगों के लिए लागू होगी, जिन्होंने संवैधानिक पाप किया है? या उन लोगों के लिए, जिन्होंने संवैधानिक पाप की शिकायत की है’?  सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी पूछा था कि क्या चुनाव आयोग दोनों गुटों को आरक्षित धनुष बाण निशान देने से इनकार कर सकता था? कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि जिन विधायकों की सदस्यता पर अयोग्यता की कार्यवाही चल रही हो, उनकी संख्या को बहुमत का सुरक्षित आधार माना जा सकता है या नहीं?

मंगलवार को सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे गुट ने दलीलें दी कि चुनाव आयोग का विधायी बहुमत के आधार पर फैसला लेना कानूनी रूप से सही था। शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने चुनाव आयोग के विधायी बहुमत की कसौटी पर भरोसा करने का बचाव किया। कौल ने कहा कि शिंदे का समर्थन करने वाले 40 विधायक, 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीतने वाले शिवसेना के 55 विधायकों के पक्ष में पड़े कुल वोटों का 76 फीसदी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने लोकसभा के आंकड़ों का भी हवाला देते हुए कहा कि शिंदे का समर्थन करने वाले 13 सांसद, पार्टी के जीतने वाले 18 सांसदों के पक्ष में पड़े कुल वोटों का 73 फीसदी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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