नई दिल्ली। एक ही जगह पर लंबे समय तक धरना प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को कहा कि कोई भी संगठन प्रदर्शन के लिए किसी सार्वजनिक जगह पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के लिए तय जगहों पर भी एक तय समय सीमा होनी चाहिए, ताकि दूसरे संगठनों को भी अपनी बात रखने का मौका मिल सके। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन सबका अधिकार है, किसी एक का नहीं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा, ‘आप हमेशा के लिए किसी जगह पर कब्जा नहीं कर सकते। वहां किसान, पत्रकार, मजदूर और दूसरे प्रदर्शनकारी कहां जाएंगे? सभी को प्रदर्शन करने का अधिकार है’। असल में मंगलवार को जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच दिल्ली में अक्टूबर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, लोगों की हिरासत, निगरानी, प्रदर्शन स्थलों और कारोबारियों को हुए नुकसान से जुड़े मामलों पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि प्रदर्शनों के कारण दिल्ली में कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। त्योहारों के सीजन में दुकानें बंद रहीं और बिक्री घट गई। उन्होंने नुकसान का आंकड़ा भी दिया। रोहतगी ने अदालत से अगले दो महीने तक किसी भी तरह के प्रदर्शन या धरने पर रोक लगाने की मांग की।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी को जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए सिर्फ एक दिन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी 17 दिन तक वहां बैठे रहे। सुनवाई में सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने करीब सात हजार लोगों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोकतंत्र के रूप में हम इससे प्रभावित नहीं हो रहे हैं?
सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर किस तरह की निगरानी की जा रही है और इसके लिए कौन सा कानूनी प्रावधान है। इस पर सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान केवल सीसीटीवी से निगरानी की गई। उन्होंने कहा कि सैकड़ों सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर भी प्रदर्शन की लाइव रिकॉर्डिंग कर रहे थे, लेकिन सरकारी सीसीटीवी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
