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उच्चतम न्यायालय ने सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को लेकर एक छात्र को जारी नोटिस पर सवाल उठाए

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट के उस फ़ैसले पर सवाल उठाए जिसमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रस्तावित छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कथित तौर पर प्रचार कर रहे एक छात्र को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया था।

न्यायालय ने कहा कि जब विरोध प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर पहले ही रद्द की जा चुकी थीं और यह निर्देश दिया गया था कि सीजेपी विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रों के ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई न की जाए, तो ऐसा नोटिस जारी नहीं किया जाना चाहिए था।

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वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने उठाया। उन्होंने बताया कि ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के दूसरे वर्ष के एक छात्र को नोटिस जारी कर शांति बनाए रखने के लिए पांच लाख रुपये का निजी बॉन्ड भरने का निर्देश दिया था। बताया जाता है कि बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सवाल किया कि विरोध प्रदर्शन से जुड़े छात्रों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई न करने के उच्चतम न्यायालय के पहले के निर्देश के बावजूद मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं। अदालत ने अधिवक्ता से नोटिस को रिकॉर्ड पर रखने को कहा और कहा कि वह अधिकारियों से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेगें।

बीएनएसएस की धारा 126 और 135 के तहत चार सितंबर को जारी नोटिस में आरोप लगाया गया था कि छात्र अक्षत त्रिपाठी दूसरों को प्रस्तावित सीजेपी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे और उनकी गतिविधियों से शांति भंग हो सकती थी।

Pic Credit : ANI

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