नई दिल्ली। कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर नतीजे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई। असल में सुप्रीम कोर्ट ने वोटों की गिनती के समय के वीडियो फुटेज पेश करने को कहा, जिस पर आयोग ने कहा कि रिकॉर्डिंग नहीं मिल रही है। इस पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताई।
वोटों की गिनती की वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिलने पर चुनाव आयोग को फटकार लगाते हुए जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने आयोग से कहा, ‘चुनाव आयोग यह कैसे कह सकता है कि उसका रिकॉर्ड खो गया? आपका काम चुनाव कराना है और आपके पास दस्तावेज होना चाहिए। यह कहने का सवाल ही नहीं है कि आप उसे ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह के बहाने नहीं चलेंगे’।
अदालत ने कांग्रेस के विधायक टीडी राजेगौड़ा की याचिका पर सुनवाई की। 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में शृंगेरी सीट पर राजेगौड़ा ने भाजपा उम्मीदवार डीएन जीवराज को 201 वोटों से हराया था। जीवराज ने इस नतीजे को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। छह अप्रैल 2026 को कर्नाटक हाई कोर्ट ने पोस्टल बैलेट की दोबारा जांच का आदेश दिया। इसमें पहले खारिज किए गए 279 पोस्टल बैलेट की फिर से जांच भी शामिल थी। तीन मई 2026 को संशोधित नतीजा घोषित हुआ। इसमें राजेगौड़ा के वोट 255 कम हो गए और जीवराज को विजेता घोषित कर दिया गया।
इसके बाद राजेगौड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने सिर्फ 279 खारिज पोस्टल बैलेट की दोबारा जांच का आदेश दिया था। लेकिन उनके मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके पक्ष में पड़े 562 वैध पोस्टल बैलेट पर भी दोबारा विचार किया। उन्होंने इस कार्रवाई को चुनौती दी है। राजेगौड़ा ने मूल मतगणना और दोबारा गिनती के वीडियो के साथ चुनाव पर्यवेक्षक की रिपोर्ट मांगी है। लेकिन चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2023 की काउंटिंग का वीडियो उसे नहीं मिल रहा है। इसी पर अदालत ने नाराजगी जताई।
