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पुलिस ‘बर्बरता’ को सुप्रीम कोर्ट ने गलत बताया

New Delhi, May 14 (ANI): A general view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Wednesday. (ANI Photo/Ishant)

नई दिल्ली। पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ प्रदर्शन या आंदोलन होने के आधार पर पुलिस की बर्बरता या सख्ती को सही नहीं ठहराया जा सकता।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले होना उतनी ही चिंता की बात है और सरकार से इस पर जवाब मांगा जा सकता है। अब मंगलवार को इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पेपर लीक के खिलाफ और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने ज्यादती की।

गौरतलब है कि इसी तरह की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में भी लंबित है। 22 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 जुलाई को संसद तक हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों वाली दो अलग अलग याचिकाओं पर सुनवाई की थी और केंद्र व दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था, जिसमें सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और हर स्रोत से की गई वीडियोग्राफी शामिल है।

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