कोलकाता। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी की सरकार के 15 साल के कामकाज की जांच कराएंगे। उन्होंने शुरू में सद्भाव दिखाया था और बदले की कार्रवाई नहीं करने की बात कही थी। लेकिन अब वे पूरे रंग में हैं। उन्होंने सोमवार को कैबिनेट बैठक में ममता सरकार में हुए भ्रष्टाचार के मामलों और महिला उत्पीड़न की जांच कराने का ऐलान किया। इसके लिए दो आयोग बनेंगे। दोनों आयोगों की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर जज करेंगे।
शुभेंदु अधिकारी ने ममता राज के कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए रिटायर जज जस्टिस बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता में आयोग बनाया है। इसमें एडीजी रैंक के आईपीस अधिकारी जयरामन सदस्य सचिव होंगे। आयोग कटमनी, रिश्वतखोरी, सरकारी धन के दुरुपयोग और आम लोगों से धोखाधड़ी जैसे मामलों की जांच करेगा। इसके दायरे में सरकारी अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, बिचौलिए, ठेकेदार, एनजीओ और सहकारी संस्थाएं भी आएंगी। दूसरा आयोग महिलाओं और बच्चियों पर कथित अत्याचार के मामलों की जांच करेगा। इसकी अध्यक्षता रिटायर जज जस्टिस समाप्ति चटर्जी करेंगी, जबकि आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन सदस्य सचिव होंगी।
इसके साथ ही शुभेंदु अधिकारी सरकार ने इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों को दिए जाने वाले मानदेय को एक जून से बंद करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से किए गए वादे को पूरा करने में देरी नहीं की है। उन्होंने महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने तीन हजार रुपए देने और मुफ्त बस यात्रा शुरू करने का ऐलान कर दिया है। शुभेंदु ने राज्य सरकार की नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है।
सरकार ने चुनाव के समय किए वादे के मुताबिक महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत एक जून से महिलाओं को हर महीने तीन हजार रुपए दिए जाएंगे। सरकार ने कहा कि जो महिलाएं पहले से ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ का लाभ ले रही हैं, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
