नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबी बातचीत और उतार चढ़ाव के बाद आखिरकार मुक्त व्यापार संधि हो गई है। यूरोप के 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ की ओर से समझौते पर मुहर लगाने भारत दौरे आईं उर्सुला वॉन डेर लियेन ने इस संधि को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दोपक्षीय शिखर वार्ता के बाद यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लियेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनिया कोस्टा की मौजूदगी में इस समझौते पर दस्तखत किया गया।
इस समझौते के तहत यूरोप में बनने वाली लक्जरी गाड़ियों पर टैक्स 110 से घटा कर 10 फीसदी कर दिया गया है। इससे बीएमडब्लु से लेकर दूसरी अनेक गाड़ियों के दामों में बड़ी कमी आएगी। इसी तरह यूरोप के प्रीमियम शराब पर टैक्स घटा कर 20 से 30 फीसदी किया गया है। अभी यूरोपीय ब्रांड की शराबों पर डेढ़ सौ फीसदी तक टैक्स लगता है। यह समझौता अगले साल लागू हो सकता है। उससे पहले यूरोप के सभी 27 देशों और फिर यूरोपीय संघ की संसद से इस समझौते को मंजूर कराना होगा।
गौरतलब है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच 2007 में सबसे पहले व्यापार संधि की वार्ता शुरू हुई थी। बाद में यह वार्ता रूक गई। लेकिन 2022 में इसने फिर जोर पकड़ा और 15 दौर की वार्ता के बाद इसे अंतिम मुकाम तक पहुंचाया गया। भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं की बीच मंगलवार को हुए 16वें भारत और यूरोपीय संघ के शिखर सम्मेलन के दौरान इसका ऐलान किया गया। इस समझौते से भारतीय उत्पादों खास कर कपड़े, चमड़ा, चमड़े से बने उत्पाद, जेम्स एंड ज्वेलरी, खिलौने आदि के निर्यात के लिए बड़ा बाजार मिलेगा।
भारत और यूरोपीय संघ की साझा आबादी दो सौ करोड़ है। यानी दुनिया की एक चौथाई आबादी इस समझौते के दायरे में है। ध्यान रहे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि यूरोपीय संघ दूसरी सबसे बड़ी। दोनों को मिला कर वैश्विक जीडीपी का करीब 25 फीसदी और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक तिहाई होता हैं। शिखर वार्ता के बाद समझौते की जानकारी देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि कोई भी समझौता तभी किया जाता है, जब दोनों पक्षों को उसमें फायदा दिखता है।
विदेश सचिव ने कहा कि इस समझौते में दोनों तरफ का हित जुड़ा हुआ है और दोनों को इससे लाभ नजर आ रहा है, इसी वजह से यह समझौता किया गया है। विक्रम मिस्री ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ बिजनेस फोरम में दोनों पक्षों के एक सौ से अधिक सीईओ शामिल हुए। उन्होंने बताया कि तेजी से बदलती दुनिया में भारत और यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी सिर्फ दोपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गई है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक और रणनीतिक संतुलन तेजी से बदल रहा है।
