नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में गिरावट का सिलसिला गुरुवार को जारी रहा। गुरुवार को रुपए की कीमत में 28 पैसे की बड़ी गिरावट हुई। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही एक डॉलर की कीमत 90 रुपए की मनोवैज्ञानिक सीमा से ऊपर गई थी। गुरुवार को रुपए की कीमत में गिरावट के बाद डॉलर की कीमत 90.43 के स्तर पर पहुंच गई। बुधवार, तीन दिसंबर को ये 90.15 के स्तर पर बंद हुआ था।
बाजार से विदेशी फंड लगातार निकाले जाने से रुपए पर दबाव बना हुआ है। इसकी वजह से 2025 में अब तक रुपया साढ़े पांच फीसदी कमजोर हो चुका है। एक जनवरी 2025 को को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था, जो अब 90.43 रुपए पर पहुंच गया है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया हैं। इससे जीडीपी में कमी और वित्तीय घाटा दोनों बढ़ने की आशंका है। यह रुपए की कीमत में गिरावट का एक कारण माना जा रहा है।
इसके अलावा एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि जुलाई 2025 से अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने 1.03 लाख करोड़ से ज्यादा की बिक्री की है। इसकी वजह भी अमेरिकी टैरिफ की चिंता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ गई है। रुपए की लगातार गिरती कीमत पर विपक्षी पार्टियां भी सरकार से सवाल पूछ रही हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गुरुवार को कहा, ‘यह बहुत अजीब बात है कि जब रुपया 60 से कम था, तो वे डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के जमाने की बात करते थे, लेकिन अब रुपया 90 पर पहुंच गया है, अब यह किस जमाने से मुकाबला कर रहा है’।
