नई दिल्ली। इस साल जुलाई में दिल्ली के जंतर मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुई हिंसा की जांच का दायरा बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान अलग अलग हिस्सों में हुई हिंसा की जांच के लिए एक हाई पावर्ड इन्क्वायरी कमेटी यानी एचपीईसी का गठन किया था। रिटायर जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की कमेटी ने एक पोर्टल लॉन्च किया है। इस पर जुलाई में हुई हिंसा से प्रभावित लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
समिति का गठन तीन महीने पहले अगस्त में हुआ था। तीन महीने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह पोर्टल तैयार किया है, जिसे शनिवार को लॉन्च किया गया। hpec.nic.in नाम से तैयार इस पोर्टल पर प्रभावित आम लोगों के साथ साथ पुलिसकर्मी भी अपने साथ हुई हिंसा की शिकायत दर्ज कर सकेंगे। गौरतलब है कि 20 जुलाई की घटना के बाद दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों और जवानों के परिजनों से प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उसके बाद अक्टूबर के घटनाक्रम में भी दिल्ली पुलिस के जवानों को पीड़ित दिखाते हुए वीडियो बनाया गया है।
इस मामले में पहले दिन से ऐसा लग रहा है कि सरकार किसी तरह से प्रदर्शनकारियों को कठघरे में खड़ा करना चाहती है। पुलिस की बर्बर कार्रवाई के ऊपर प्रदर्शनकारियों के कथित हमले को मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। इस पोर्टल को इस तरह के तैयार किया गया है कि संवेदनशील मामलों में प्रभावित लोगों की पहचान गोपनीय रखी जा सके और उनकी इच्छा के अनुसार पहचान सार्वजनिक न हो।
हिंसा से प्रभावित लोगों और अन्य संबंधित पक्षों से अपील की गई है कि वे पोर्टल पर जाकर तय फॉर्मेट के अनुसार अपनी शिकायतें या प्रतिनिधित्व अपलोड करें। कहा गया है कि यह कमेटी जुलाई में हुई हिंसा खास कर पैलेट गन के इस्तेमाल की शिकायतों की विस्तार से जांच करेगी। यह भी कहा गया है कि कमेटी दोनों पक्षों की ओर से की गई हिंसा की जांच करेगी। महिला प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की भी जांच की जाएगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के ऊपर दर्ज सारे मुकदमे रद्द करा चुकी है। लेकिन इस जांच के बाद क्या होगा, यह नहीं कहा जा सकता है।
