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चुनाव याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को कहा, ‘बंगाल में सीटों पर जीत का अंतर एसआईआर में कटे वोटों से कम होने के मामले में ममता बनर्जी और अन्य लोग नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं’। अदालत इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

चुनाव नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि चुनाव में 31 सीटों पर जीत का अंतर, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान हटाए गए वोटों की संख्या से कम था। सोमवार को जिस समय चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच बंगाल में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी उसी समय इस बात का जिक्र किया गया।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने जस्टिस जॉयमाल्य बागची की उस टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम है, तो अदालत शिकायतों पर विचार कर सकती है। इस पर अदालत ने कहा कि इस मामले में ममता बनर्जी और अन्य लोग नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं। कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया ‘मेरे एक उम्मीदवार 862 वोटों से हारे, जबकि दिलचस्प बात यह है कि उस निर्वाचन क्षेत्र में SIR के दौरान 5,550 वोट हटा दिए गए थे। ऐसी 31 सीटें हैं, जहां जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम था’।

चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील डीएस नायडू ने कहा कि इसका उपाय चुनाव याचिका है। उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़े मुद्दों और मतदाता सूची संशोधन के दौरान वोट जोड़ने या हटाने के खिलाफ अपीलों के लिए ही चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। जस्टिस बागची ने इस दौरान कहा नतीजों, वोट हटाने आदि के बारे में जो भी कहना है, उसके लिए अलग अंतरिम आवेदन दाखिल करना होगा। चुनाव आयोग जो यह कह रहा है कि चुनाव याचिका ही उपाय है, वह अपनी जवाबी हलफनामे में यह बात रख सकता है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल को कहा था कि चुनाव नतीजों में तभी दखल दिया जाएगा, जब बड़ी संख्या में मतदाता बाहर किए गए हों और वह संख्या जीत के अंतर को प्रभावित करती हो। जस्टिस बागची ने आयोग से कहा था कि मान लीजिए कि जीत का अंतर दो फीसदी है और 15 फीसदी मतदाता वोट नहीं डाल सके, तो हमें इस पर सोचना होगा। यह चिंता का मामला हो सकता है। यह मत समझिए कि बाहर किए गए मतदाताओं का सवाल हमारे दिमाग में नहीं है।

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