नई दिल्ली। ईरान में 16 भारतीय एक महीने से ज्यादा समय से कैद हैं और उनकी कोई सूचना नहीं है। भारत सरकार ने माना है कि ईरान ने कौंसुलर एक्सेस नहीं मुहैया कराया है। यानी भारतीय दूतावास के अधिकारी उन बंदियों से नहीं मिल पाए हैं। ये बंदी तेल लेकर जा रहे जहाज एमटी वैलिएंट के चालक दल के सदस्य हैं। ईऱान ने इस जहाज को आठ दिसंबर जब्त किया था और उस जहाज पर मौजूद सभी लोगों को बंदी बना लिया था। बंदी बनाए गए भारतीय नागरिकों के परिजन प्रधानमंत्री से लेकर हर जगह उनकी रिहाई के लिए गुहार लगा रहे हैं।
इस टैंकर को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जब्त किया था। संयुक्त अरब अमीरात के दिब्बा के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में रिवोल्य़ूशनरी गार्ड्स ने जहाज को जब्त किया। ईरान का आरोप है कि इस जहाज से छह हजार मीट्रिक टन तेल की तस्करी की जा रही थी। तेहरान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि जहाज जब्त होने और भारतीयों को बंदी बनाए जाने की सूचना मिलने के बाद से भारत ने कई बार ईरान के अधिकारियों से कौंसुलर एक्सेस देने का अनुरोध किया है। बंदियों को अपने परिवार से संपर्क करने की छूट देने की भी मांग की गई है।
भारतीय दूतावास की ओर से ईरानी अधिकारियों को पत्र लिख कर कहा गया है कि भारत के राजनयिकों को बंदियों से मिलने दिया जाए। इसके अलावा निजी तौर पर मुलाकात करके भी यह अनुरोध किया गया है। यहां तक कि भारत के राजदूत के स्तर से भी इसकी अपील की गई है। भारतीय दूतावास की ओर से बताया गया है कि 15 दिसंबर को भारतीय दूतावास ने संयुक्त अरब अमीरात की उस कंपनी से संपर्क कर लिया था, जिसका जहाज था। उसके बाद से दूतावास के अधिकारी ईरान में स्थित उस कंपनी के एजेंट्स के संपर्क में हैं। दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास की ओर से कंपनी के ऊपर दबाव डाला जा रहा है कि वह बंदियों को कानूनी सहायता मुहैया कराए।
