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ओपेक से बाहर होगा यूएई

नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले की वजह से पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। यूएई ने तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक से बाहर निकलने का ऐलान किया है। उसने साथ ही ओपेक प्लस संगठन से भी अलग होने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यूएई का यह फैसला हैरान करने वाला है। इससे सिर्फ खाड़ी क्षेत्र में नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पर भी बड़ा असर पड़ेगा।

यूएई के इस फैसले से दशकों से चले आ रहे वैश्विक तेल समीकरण पूरी तरह से बदल सकते हैं। गौरतलब है कि यूएई 1967 से ओपेक का सदस्य रहा है। 59 साल के बाद उसने अपने को इससे अलग किया है। माना जा रहा है कि फैसला अचानक नहीं हुआ। जानकार सूत्रों के मुताबिक यूएई चाहता है कि वो ज्यादा तेल निकाले, क्योंकि उसके पास ऐसा करने की क्षमता है। लेकिन ओपेक के नियम उसे तेल उत्पादन बढ़ाने की इजाजत नहीं देते थे।

यह भी कहा जा रहा है कि ईरान पर अमेरिकी हमले और उसके बाद ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर किए गए हमले से हालात बिगड़े हैं, जिसके बाद यूएई ने यह फैसला किया है। यूएई के इस फैसले से तेल की वैश्विक आपूर्ति शृंखला और तेल की भू राजनीति पूरी तरह से बदल सकती है। इस फैसले से आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और भी ज्यादा उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए ये खबर राहत भरी भी हो सकती है। यूएई उत्पादन बढ़ाता है तो तेल की कीमतें गिर सकती हैं। यूएई के उत्पादन बढ़ाने से ओपेक देशों पर भी उत्पादन बढ़ाने का दबाव होगा। हालांकि ओपेक देश कीमतों के नियंत्रित करने के लिए उत्पादन कम भी कर सकते हैं। परंतु पिछले कुछ समय से गैर ओपेक देशों में तेल का उत्पादन बढ़ने से ओपेक के हाथ बंधे हैं।

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