नई दिल्ली। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने एक बार फिर भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर प्रतिकूल टिप्पणी की है। इतनी है नहीं अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी यूएससीआईआरएफ ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस पर पाबंदी लगाने की मांग की है। आयोग ने अमेरिका की सरकार से आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है।
गौरतलब है कि आयोग के अध्यक्ष आसिफ महमूद हैं, जो पाकिस्तानी मूल के हैं। उन्होंने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। गौरतलब है कि आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। उससे पहले अमेरिकी धार्मिक आयोग के अध्यक्ष ने यह बयान दिया है।
यूएससीआईआरएफ के कमिश्नर जीन मिल्स ने भी कहा कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए। गौरतलब है कि इस संस्था ने पहले कई बार भारत को ‘विशेष चिंता का देश’ यानी यानी सीपीसी घोषित करने की सिफारिश की है। आयोग ने पहली बार 2004 में यह सिफारिश की थी और 2020 में इसे फिर दोहराया। इसके बाद 2021 से 2026 तक की रिपोर्टों में भी इस संस्था ने ने भारत को सीपीसी सूची में शामिल करने की मांग की। हालांकि इसकी सिफारिश का कोई मतलब नहीं है।
