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ईरान ने रखीं शर्तें!

नई दिल्ली। अमेरिका की ओर से दिया गया 15 सूत्री शांति प्रस्ताव ईरान को मिल गया है लेकिन बताया जा रहा है कि उसने इसे खारिज कर दिया है। ईरान ने अपनी पांच शर्तें रखी हैं। ईरान ने तत्काल युद्ध खत्म करने और उसके लोगों की हत्या पर रोक लगाने की शर्त रखी है। इसके बाद उसने कहा कि फिर से युद्ध नहीं होने की पक्की गारंटी देनी होगी। इसके अलावा ईरान ने नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा मांगा है और अपने सभी प्रॉक्सी समूहों पर हमला रोकने को भी कहा। इसकी नई मांग यह है कि होरमुज की खाड़ी पर ईरान की संप्रभुता पूरी दुनिया स्वीकार करे।

गौरतलब है कि पाकिस्तान और तुर्किए दोनों दावा कर रहे हैं वे ईरान के साथ अमेरिका और इजराइल की जंग रूकवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इस बीच खबर है कि पाकिस्तान के दो अधिकारियों ने अमेरिका की ओर से दिए गए 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को ईरान तक पहुंचाया है। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान को राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद पर भरोसा नहीं है। वह चाहता है कि अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस को वार्ताकार बनाया जाए। ईरान का मानना है कि उप राष्ट्रपति वेंस युद्ध के समर्थक नहीं हैं।

दूसरी ओर तुर्किए के विदेश मामलों के उपाध्यक्ष हारुन अरमगान ने कहा है कि उनका देश ईरान और अमेरिका के बीच संदेश पहुंचाने की भूमिका निभा रहा है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके देश का मकसद तनाव कम करना और दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का रास्ता तैयार करना है। अरमगान ने कहा कि तुर्किए के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं और वह कुछ देशों के साथ मिलकर खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि मध्यस्थता के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से संपर्क किया था। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से दिए गए सीजफायर से जुड़े प्रस्ताव ईरान को सौंप दिए हैं। अब उसके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदाम ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच अब तक कोई भी बातचीत नहीं हुई है।

पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने कहा, ‘हमने भी मीडिया में ऐसी खबरें सुनी हैं, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार और ट्रंप के दावों के उलट, दोनों देशों के बीच अब तक न तो सीधी और न ही परोक्ष बातचीत हुई है’। मोगदाम ने यह भी बताया कि कुछ मित्र देशों ने दोनों पक्षों के साथ बातचीत और संपर्क किया है, ताकि युद्ध को खत्म करने की कोशिश की जा सके।

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