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सबरीमाला मंदिर मामले में फैसला सुरक्षित

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश सहित अनेक धार्मिक स्थलों पर होने वाले भेदभाव और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अन्य मामलों में सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने सात अप्रैल से सुनवाई शुरू की थी। गुरुवार, 14 मई को सुनवाई पूरी करके अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में नौ जजों की संविधान बेंच ने 16 दिन तक केंद्र सरकार, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं। कोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे, संवैधानिक नैतिकता और धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा जैसे साथ संवैधानिक सवालों पर फैसला देगी। इनमें सबसे अहम मासिक धर्म के उम्र वाली यानी 10 से 50 साल की महिलाओं की सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का विवाद है।

गौरतलब है कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने महिलाओं के सबरीमला मंदिर में प्रवेश पर लगी पाबंदी को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था। अदालत के इस फैसले को चुनौती दी गई है। नौ जजों की संविधान बेंच में 16 दिनों की सुनवाई के दौरान सात संवैधानिक सवालों पर बहस हुई। इस मामले में केंद्र सरकार महिलाओं की एंट्री के विरोध में है।

सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के मामले के साथ मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद और दरगाहों में प्रवेश और पारसी महिलाओं के अगियारी में प्रवेश से जुड़े मुद्दे भी बड़ी बेंच को भेजे गए थे। सबरीमाला मंदिर मामले पर सात अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। सबसे पहले केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

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