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ईरान की अवसंरचनाओं पर हमला हुआ तो ‘आंख के बदले आंख’ वाला सिद्धांत अपनाएंगे : अराघची

New Delhi, May 08 (ANI): Minister of Foreign Affairs of Iran, Dr. Abbas Araghchi calls on President Droupadi Murmu at Rashtrapati Bhavan in New Delhi on Thursday. (ANI Photo)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए गुरुवार को कहा कि ईरान की अवसंरचनाओं पर किसी भी हमले का करार जवाब दिया जायेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान को चेतावनी दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर दागी गई हर मिसाइल, रॉकेट या ड्रोन के जवाब में अमेरिका ईरान के किसी पुल या बिजली संयंत्र पर हमला करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हमले का उसी अनुपात में जवाब दिया जाएगा।

श्री अराघची ने इसके जवाब में कहा, “हमारा रक्षा सिद्धांत स्पष्ट है, आंख के बदले आंख। ईरान अथवा उसके बुनियादी ढांचे के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई का शक्तिशाली और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।” यह बयानबाजी ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी सेना लगातार 12वें दिन ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रही है।

अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि 22 जुलाई की रात उसने लगातार 12वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किये। इन हमलों में समुद्री सैन्य क्षमताओं, मिसाइल एवं ड्रोन भंडारण केंद्रों, तटीय निगरानी ठिकानों तथा वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया, जिससे वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने की ईरान की क्षमता और कमजोर हुई है।

सेंटकॉम के अनुसार, इस महीने समुद्री नाकेबंदी फिर शुरू किए जाने के बाद अमेरिकी बलों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। कमान ने दावा किया कि उसने अब तक नौ वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदलवाया है और एक अन्य जहाज को निष्क्रिय किया है ताकि वह ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश या वहां से प्रस्थान न कर सके।

सेंटकॉम ने कहा कि पश्चिम एशिया में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और वे पूरी सतर्कता के साथ किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि उनकी सेना ने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किये हैं। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, जबकि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी ली।

आईआरजीसी ने गुरुवार को कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले ईरानी क्षेत्र पर अमेरिका के लगातार हमलों के जवाब में किये गये और उनका निशाना वे सैन्य ठिकाने थे, जहां से ईरान पर हमले किये जाते हैं।

जॉर्डन की जनता को संबोधित बयान में आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर थाड मिसाइल रक्षा रडार, पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली, सी-रैम रडार, ईंधन भंडारण टैंक और हेलीकॉप्टर रखरखाव सुविधाओं को नष्ट कर दिया है।

आईआरजीसी ने कहा कि वह जॉर्डन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है, लेकिन जॉर्डन की धरती पर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को उसने अमेरिकी नियंत्रण वाला “कब्जे वाला क्षेत्र” बताया। बयान में कहा गया, “अपने देश पर हमला करने वाले और हमारे बच्चों के हत्यारों को, जहां से भी वे हमले करते हैं, निशाना बनाना हमारा कानूनी, धार्मिक और तार्किक अधिकार है।

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युद्ध अब लाल सागर तक फैल गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने दो सऊदी तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया क्योंकि वे कथित नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहे थे। सऊदी अधिकारियों ने एक टैंकर को नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है, हालांकि हमले के लिए किसी का नाम नहीं लिया है।

वैश्विक तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव बना हुआ है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि जलडमरूमध्य अब भी बंद है और बिना समन्वय के वहां से गुजरने वाले जहाजों को परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कहा, “यदि हमारी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो किसी का भी बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं रहेगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान को तेल निर्यात से रोका गया तो क्षेत्र के अन्य देशों को भी तेल निर्यात में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “या तो सबका होगा या किसी का नहीं।”

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है और जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य ईरान का परमाणु निरस्त्रीकरण है। उसके पास कभी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।”

श्री रुबियो ने कहा कि जब तक ईरान का नेतृत्व समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उस पर दबाव बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा, “जब तक उन्हें समझ नहीं आती, हर रात इसकी कीमत बढ़ती जाएगी।” लगातार बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हुआ है। नौवहन मार्गों पर खतरे की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गयी है।

अमेरिका ने कहा कि 14 जुलाई को ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू किए जाने के बाद से उसने नौ वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदलवाया है और एक अन्य जहाज को निष्क्रिय किया है। वहीं क्षेत्र में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों में घायल लगभग एक दर्जन अमेरिकी सैनिकों को उपचार के लिए जर्मनी के एक सैन्य अस्पताल भेजा गया है।

दोनों पक्षों की लगातार बढ़ती धमकियों के बीच यह टकराव अब व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेने की आशंका पैदा कर रहा है, जिसमें सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।

Pic Credit : ANI

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