पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल बाजार में आए तेज उछाल का असर अब यूरोप में साफ दिख रहा है। जर्मनी में बढ़ती ईंधन कीमतों पर लगाम लगाने के लिए संसद ने एक असामान्य कदम उठाने की तैयारी की है।
जर्मनी की संसद ‘बुंडेस्टैग ‘ में आज एक मसौदा कानून को मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके तहत पेट्रोल पंप दिन में केवल एक बार—दोपहर 12 बजे—कीमत बढ़ा सकेंगे। हालांकि, कीमतें किसी भी समय घटाई जा सकेंगी। इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर 1 लाख यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस प्रस्ताव के लागू होने पर पेट्रोल पंपों पर दोपहर से ठीक पहले लंबी कतारें देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि उपभोक्ता बढ़ी कीमतों से बचने के लिए पहले ही ईंधन भरवाने की कोशिश करेंगे।
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दरअसल, अमेरिका-इजराइल सैन्य कार्रवाई के बाद जर्मनी उन यूरोपीय देशों में शामिल रहा है जहां ईंधन कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कार्रवाई से पहले के सप्ताह की तुलना में पेट्रोल की कीमतों में 27 सेंट प्रति लीटर और डीजल में 42 सेंट प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि यूरोपीय औसत—पेट्रोल के लिए 20 सेंट और डीजल के लिए 36 सेंट प्रति लीटर—से काफी अधिक है।
जर्मनी सरकार को सलाह देने वाली स्वतंत्र आर्थिक संस्था ‘मोनोपॉलकोमिशन’ द्वारा संकलित इन आंकड़ों से साफ है कि देश के उपभोक्ता इस वैश्विक तेल संकट का सबसे ज्यादा बोझ झेल रहे हैं।
सोशल डेमोक्रेट्स पार्लियामेंट्री ग्रुप के डिप्टी चेयर आर्मंड जोर्न ने इंडस्ट्री पर प्रॉफिट कमाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बिल्ड अखबार को बताया, “जर्मनी में हमें सप्लाई की समस्या नहीं है, लेकिन प्राइसिंग की साफ दिक्कत है।” जोर्न ने कहा कि शायद ही किसी दूसरे यूरोपीय देश में संकट के दौरान उपभोक्ताओं की कीमत पर इतना बड़ा प्रॉफिट कमाया गया हो।
हाई नून रूल (12 बजे वाला नियम) (बुंडेसरात यानी ऊपरी सदन से पास होने के बाद लागू होगा) को लेकर लोग बंटे हुए हैं। फेडरेशन ऑफ जर्मन इंडस्ट्रीज (बीडीआई) ने एंटी-ट्रस्ट कानून को सख्त बनाने की आलोचना की है।
Pic Credit : ANI
