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ईरान ने ओमान के साथ होर्मुज से आवागमन के मार्ग पर सहमति जतायी

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन के लिए एक मार्ग पर सहमति बनी है और अमेरिका द्वारा जून में हुए इस्लामाबाद समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी किये जाने पर ईरान जलडमरूमध्य को फिर खोल देगा।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, श्री पेजेशकियान ने शुक्रवार को कहा, “हमने ओमान के साथ होर्मुज से आवागमन के मार्ग पर सहमति जताई है और यदि अमेरिका समझौता ज्ञापन के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करता है तो हम जलडमरूमध्य खोल देंगे।

उन्होंने कहा कि इस मार्ग की जानकारी ईरान के सर्वोच्च नेता को भी दे दी गयी है और इस संबंध में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

श्री पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका द्वारा प्रतिबंध हटाने, नाकाबंदी समाप्त करने, ईरान की जब्त संपत्तियां जारी करने, निवेश शुरू करने और लेबनान में युद्ध समाप्त करने संबंधी प्रतिबद्धताएं पूरी करने पर तेहरान होर्मुज को खोल देगा। उन्होंने कहा कि वार्ता में हुई प्रगति से संकेत मिलता है कि अमेरिका भी जून के समझौते पर लौटने को स्वीकार करता है।

ईरानी राष्ट्रपति के अनुसार, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के 13 में से 12 सदस्यों ने समझौते के पक्ष में मतदान किया था। उन्होंने इसे महत्वपूर्ण सहमति करार देते हुए कहा कि समझौते के दौरान प्रतिबंधों और नाकाबंदी में शुरुआती राहत मिली थी तथा ईरानी संपत्तियों को जारी करने और करीब 300 अरब डॉलर के निवेश की योजनाओं पर भी चर्चा हुई थी।

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श्री पेजेशकियान ने बताया कि युद्ध के कारण ईरान के आयात और निर्यात में 25 से 35 प्रतिशत तक कमी आयी है। उन्होंने कहा कि समझौता प्रभावी रहने के दौरान ईरान ने करीब नौ करोड़ बैरल तेल का निर्यात किया था।

उन्होंने कहा कि ईरान ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ भी प्रस्तावित निवेश को लेकर बातचीत की थी, लेकिन युद्ध जारी रहने की स्थिति में ये परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ सकतीं। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर उन्होंने कहा कि ईरान इसे पहले की स्थिति में लाने के लिए काम कर रहा है, लेकिन अमेरिका द्वारा समझौते का पालन नहीं किए जाने के कारण वह व्यवस्था टूट गयी।

श्री पेजेशकियान ने घरेलू ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान इस समय युद्ध की स्थिति में है और परिवहन मार्गों के बाधित होने तथा वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने से सरकार के सामने गंभीर चुनौतियां हैं।

उन्होंने कहा कि ईंधन की खपत घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने, घर से काम को प्रोत्साहित करने तथा टैक्सियों और मोटरसाइकिलों के विद्युतीकरण जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पेट्रोल की कीमत बढ़ाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

Pic Credit : ANI

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