हिंद महासागर में एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की ईरान की कथित कोशिश ने अमेरिका को चिंतित कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम अब भारत के पास के समुद्री इलाकों तक अपनी पहुंच बढ़ा रहा है।
अमेरिकी लॉमेकर्स ने बताया कि डिएगो गार्सिया की ओर एक मिसाइल लॉन्च किए जाने की खबर है। यह ठिकाना हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन का एक अहम सैन्य बेस है। उनका कहना है कि इस घटना से साफ होता है कि ईरान अब अपने क्षेत्र से बहुत दूर तक ताकत दिखाने में सक्षम हो रहा है।
अमेरिकी स्पेस कमांड के प्रमुख जनरल स्टीफन व्हाइटिंग ने कहा कि ईरान के मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम आपस में जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “बैलिस्टिक मिसाइल असल में अंतरिक्ष रॉकेट ही होते हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान लंबी दूरी तक हमला करने के लिए जरूरी कई तकनीक पहले ही विकसित कर चुका है। सीनेटर टॉम कॉटन ने कहा कि ईरान लॉन्च सिस्टम और री-एंट्री व्हीकल तकनीक को जोड़कर अपनी मारक क्षमता और बढ़ा सकता है। इस पर एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने सहमति जताते हुए कहा कि ईरान यह क्षमता जल्दी हासिल कर सकता है।
अमेरिकी स्ट्रैटेजिक कमांड के प्रमुख एडमिरल रिचर्ड कैरोल ने कहा कि ईरान ने इस दिशा में जरूरी तकनीक का प्रदर्शन कर दिया है।
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लॉमेकर्स का कहना है कि ईरान का अंतरिक्ष कार्यक्रम मिसाइल विकास में मदद कर सकता है, क्योंकि सैटेलाइट लॉन्च करने वाली तकनीक और लंबी दूरी की मिसाइलों की तकनीक काफी हद तक एक जैसी होती है।
इस चर्चा में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सेनाओं और उसके सहयोगी देशों के लिए पैदा होने वाले खतरों पर रोशनी डाली गई। हिंद महासागर दुनिया भर के व्यापार और ऊर्जा की आपूर्ति के लिए एक अहम रास्ता है। पारंपरिक तौर पर इसे ईरान की मारक सीमा के भीतर नहीं माना जाता था। लेकिन अब यह सोच बदल रही है।
अधिकारियों ने साइबर खतरों को लेकर भी चिंता जताई। वाइटिंग ने कहा कि साइबर स्पेस सिस्टम की “सबसे कमज़ोर कड़ी” है। उन्होंने चेतावनी दी कि विरोधी देश साइबर हमलों को ज्यादा तरजीह दे सकते हैं, क्योंकि ये हमले सस्ते पड़ते हैं और इनका पता लगाना भी मुश्किल होता है।
लॉमेकर्स ने कहा कि ईरान की बढ़ती ताकत से सुरक्षा योजनाएं और जटिल हो गई हैं। उन्होंने बेहतर मिसाइल चेतावनी सिस्टम और अंतरिक्ष आधारित निगरानी को मजबूत करने की जरूरत बताई।
अमेरिका लंबे समय से ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखता आया है और उसे क्षेत्र में अस्थिरता का एक बड़ा कारण मानता है। हाल के वर्षों में ईरान का मिसाइल कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ा है और उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम ने भी इसमें मदद की है।
भारत के लिए यह स्थिति खास मायने रखती है, क्योंकि हिंद महासागर में ईरान की बढ़ती पहुंच से उस क्षेत्र की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है, जो व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
Pic Credit : ANI
