अमेरिका की एक संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मसिद्ध नागरिकता के दायरे को सीमित करने के नये कार्यकारी आदेश के क्रियान्वयन पर अस्थायी रोक लगा दी है।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेबोरा बोर्डमैन ने कहा है कि आदेश के खिलाफ याचिका दायर करने वाले लोगों के इस दावे में दम है कि यह संविधान के 14वें संशोधन के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है। इस संशोधन में अमेरिका में जन्मे या प्राकृतिक रूप से नागरिक बने सभी व्यक्तियों को, जो अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन हैं, नागरिकता देने का प्रावधान है।
श्री ट्रंप ने पिछले वर्ष पद संभालने के बाद जन्मसिद्ध नागरिकता को समाप्त या सीमित करने की कोशिश की है। उच्चतम न्यायालय ने जून में उनके शुरुआती प्रयास को खारिज कर दिया था। इसके बाद ट्रंप ने पिछले महीने एक नया और सीमित आदेश जारी किया, जिसमें कथित ‘जन्म पर्यटन’, विदेशी सरकार के कर्मचारियों तथा ‘विदेशी शत्रुओं’ की श्रेणी में आने वाले माता-पिता के बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता देने से रोकने की कोशिश की गयी।
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न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि 2026 का कार्यकारी आदेश प्रमाणित समूह पर लागू किये जाने के मामले में लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय पहले ही संबंधित बच्चों को जन्म के समय नागरिक मान चुका है। उन्होंने कहा कि अदालत को राष्ट्रपति के नागरिकता का अधिकार छीनने के नवीनतम प्रयास पर एक बार फिर प्रारंभिक रोक लगानी होगी।
सरकार के वकीलों ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व फैसले ने प्रशासन को जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के नियम बनाने से नहीं रोका है। उन्होंने कहा कि राजनयिकों और विदेशी शत्रुओं के बच्चों समेत कुछ अपवाद ऐतिहासिक रूप से मान्य रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं में कई प्रवासी और वकालत संगठन सीएएसए शामिल हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जन्मसिद्ध नागरिकता के ऐतिहासिक अपवाद सीमित हैं और नया आदेश इन श्रेणियों का असंवैधानिक रूप से विस्तार करने का प्रयास करता है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने यह भी आशंका जतायी कि माता-पिता पर गलत आरोपों के आधार पर उनके बच्चों को नागरिकता से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने ‘विदेशी शत्रु’ की परिभाषा में कुछ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों के कथित सदस्यों को भी शामिल किया है। इसके अलावा, कुछ याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि अमेरिका की यात्रा के लिए विमान का टिकट खरीदना भी आदेश में उल्लिखित ‘वाणिज्यिक लेनदेन’ की श्रेणी में आ सकता है।
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