Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

किसी भी सरकार को विपक्ष पसंद नहीं

विपक्ष

भाजपा विरोधी पार्टियों का पिछले 11 साल से स्थायी आरोप है कि केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों जैसे आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग करती है। विपक्षी पार्टियां इन एजेंसियों को भाजपा का सबसे कारगर सहयोगी भी बताती हैं और आरोप लगाती हैं कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल करके केंद्र की भाजपा सरकार लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। पिछले 11 साल में इन एजेंसियों ने जितने मामले दर्ज किए हैं और कार्रवाई की है उनमें से 95 फीसदी मामले भाजपा विरोधी पार्टियों के नेताओं के खिलाफ हैं। कई राज्यों में तो इन एजेंसियों ने नेताओं के साथ साथ पार्टियों को भी आरोपी बना दिया है। विपक्ष का एक और आरोप है, जिसे आंकड़ों से भी प्रमाणित किया जा सकता है कि पहले एजेंसियां कार्रवाई करती हैं और फिर आरोपी नेता भाजपा में शामिल होकर उसकी वॉशिंग मशीन में धुल जाता है। यानी विपक्ष के नेताओं को डरा धमका कर अपनी ओर मिलाने के लिए इन एजेंसियों के इस्तेमाल होता है।

इन आरोपों में काफी हद तक सत्यता है और इन्हें देख, सुन कर ऐसा लगता है कि भाजपा विरोधी पार्टियां कितनी मुश्किलों का सामना कर रही हैं और उनके ऊपर कितना अत्याचार हो रहा है। लेकिन सवाल है कि क्या विपक्षी पार्टियां दूध की धुली हैं? बहुत लोकतांत्रिक हैं? अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल अपने विरोधियों के खिलाफ नहीं करती हैं? ध्यान रहे भाजपा विरोधी कई पार्टियां अलग अलग राज्यों में सरकार में हैं और उनके पास राज्य सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी है, सीआईडी है और अपनी पुलिस है, जिसका इस्तेमाल वे अपने विरोधियों को डराने, धमकाने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए करती हैं। यह हर विरोधी पार्टी की कहानी है चाहे वह कांग्रेस हो, आम आदमी पार्टी हो, तृणमूल कांग्रेस हो या झारखंड मुक्ति मोर्चा हो, जिसकी जहां सरकार है वह वहां अपने विरोधी को निपटाने के लिए खुले दिल से राज्य सरकार की एजेंसी का दुरुपयोग करती है। कह सकते हैं कि राज्यों में एसीबी ही ईडी और सीबीआई है। जिसकी सरकार है वह एसीबी का इस्तेमाल करके अपने विरोधी को निपटा रहा है। इससे जाहिर है कि किसी भी सत्तारूढ़ दल को विपक्षी पार्टी पसंद नहीं है।

ताजा मामला पंजाब में विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया का है। वे अकाली दल से सुप्रीमो और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह बादल के साले हैं यानी पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई हैं। पंजाब सरकार की एसीबी ने उनको 540 करोड़ रुपए के कथित घोटाले और ड्रग्स कारोबार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। मजीठिया पर पहले भी आरोप लगते रहे थे। 2007 से 2017 तक जब लगातार 10 साल अकाली दल की सरकार रही तब वे मंत्री थे और उनके ऊपर कई आरोप लगे लेकिन 2017 में जब कैप्टेन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी तो किसी वजह से कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद भी तीन साल कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन अचानक एक दिन एसीबी की टीम ने मजीठिया के यहां छापा मारा और उनको गिरफ्तार कर लिया। जेल जाते समय मजीठिया ने आम आदमी पार्टी को भी ऐसे ही रूलाने का संकल्प लिया।

ऐसा नहीं है कि पंजाब की आप सरकार की ज्यादती के शिकार अकेले मजीठिया हैं। कांग्रेस सरकार के कम से कम चार पूर्व मंत्रियों और विधायकों पर अरविंद केजरीवाल की पार्टी की सरकार ने छापे मरवाए, जांच की और उनको जेल भेजा। सोचें, केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सबसे ज्यादा हल्ला केजरीवाल ने मचाया। लेकिन जब खुद मौका मिला तो विपक्ष के नेताओं को पकड़ पकड़ कर जेल में डाला। वह तो अच्छा था कि दिल्ली में उनके पास पुलिस नहीं थी या ऊपर उप राज्यपाल का पहरा था, जो वे कुछ नहीं कर पाए। इन सबका बदला वे पंजाब में निकाल रहे हैं। पिछले दिनों दिल्ली में एसीबी ने उनके साथ उप मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और दो पूर्व मंत्रियों सत्येंद्र जैन व सौरभ भारद्वाज पर मुकदमा किया और पूछताछ शुरू की तो आम आदमी पार्टी ने इसे एसीबी का दुरुपयोग करार दिया। सोचें, उनकी पार्टी के ऊपर कार्रवाई हो तो वह एजेंसियों का दुरुपयोग है और वे विपक्षी पार्टियों के ऊपर कार्रवाई करें तो वह एजेंसियों का सदुपयोग है!

इसी तरह एजेंसियों का ‘सदुपयोग’ तेलंगाना और कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारें कर रही हैं। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के शीर्ष मंत्री केंद्रीय एजेंसियों की जांच में फंसे हैं। दूसरी ओर उन्होंने प्रदेश के विपक्षी नेताओं यानी भाजपा व जेडीएस के नेताओं को अपनी एजेंसियों की जांच में फंसाया है। कर्नाटक की एसीबी जेडीएस के नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ जांच कर रही है। उनके ऊपर जमीन हड़पने का आरोप लगा है। इसके लिए एसआईटी बनी है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के नेता बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे के खिलाफ भी जांच चल रही है। येदियुरप्पा को अगर अदालत से राहत नहीं मिलती तो एक महिला के आरोपों पर उनको गिरफ्तार कर लिया गया होता। उधर तेलंगाना में पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के ऊपर कालेश्वरम परियोजना में घोटाले के आरोप लगे हैं और कांग्रेस के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इसकी जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया है। पिछले दिनों केसीआर इस सिलसिले में पीसी घोष आयोग के सामने पेश हुए। उनके बेटे और बीआरएस पार्टी के नंबर दो केटी रामाराव पर रेवंत रेड्डी सरकार ने फॉर्मूला ई रेस में घोटाले का आरोप लगाया है। उनकी जांच एसीबी कर रही है। अब तक चार बार केटीआर एसीबी के सामने पेश हो चुके हैं और कई घंटों की पूछताछ उनसे हुई है। सोचें, राहुल गांधी को जब ईडी पूछताछ के लिए बुलाती है तो पूरी कांग्रेस पार्टी इसे एजेंसी का दुरुपयोग करार देती है लेकिन खुद कांग्रेस की सरकार केसीआर और उनके बेटे को बार बार पूछताछ के लिए हाजिर कराती है तो उसको सामान्य प्रक्रिया माना जाता है! पिछले दिनों रेवंत रेड्डी की पुलिस ने केसीआर की पार्टी बीआरएस के एक विधायक पी कौशिक रेड्डी को उगाही के मामले में गिरफ्तार किया। यानी वहां भी सारी कार्रवाई विपक्ष के नेताओं के खिलाफ है।

आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की सरकार किसी भी मुकदमे में फंसा कर वाईएसआर कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को जेल भेजना चाहती है। उनके ऊपर तीन दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा नहीं चाहती है कि जगन गिरफ्तार हों। इस वजह से उनकी गिरफ्तारी रूकी हुई है। वैसे जब जगन की सरकार थी तो उन्होंने चंद्रबाबू नायडू जैसे बड़े नेता को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। तमिलनाडु में सबको पता है कि करुणानिधि ने जयललिता को जेल भेजा तो जयललिता की पुलिस भी करुणानिधि को घसीट कर जेल ले गई थी। अब दोनों इस दुनिया में नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का परिवार केंद्रीय एजेंसियों की जांच में फंसा है तो ममता सरकार ने भाजपा नेताओं को किसी न किसी मामले में फंसाने की मुहिम छेड़ रखी है। चूंकि बंगाल में भाजपा कभी सरकार में नहीं रही है तो उसके नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले नहीं मिल रही हैं। इसलिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को पुलिस वाले पर कथित रूप से चप्पल फेंकने के आरोप में तो किसी के ऊपर सोना चोरी करने तो किसी के ऊपर मारपीट का आरोप लगा कर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है और गिरफ्तार किया जा रहा है।

झारखंड में हेमंत सोरेन खुद केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के भुक्तभोगी हैं। उनको मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और ईडी ने गिरफ्तार किया था। लेकिन उनकी सरकार ने भाजपा की रघुवर दास सरकार में मंत्री रहे पांच वरिष्ठ नेताओं के ऊपर एसीबी से भ्रष्टाचार का मुकदमा कराया था। उनको हाई कोर्ट से राहत मिली है। खुद रघुवर दास के ऊपर कई मुकदमे कराए गए। झारखंड पुलिस ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और उनके परिवार के लोगों पर दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे किए। चाहे केंद्रीय एजेंसियों के मुकदमे हों या राज्यों की एसीबी की ओर से दर्ज किए गए केस हों, उनकी मेरिट का मामला अलग है। उस पर अदालतों को विचार करना है। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि देश की कोई भी पार्टी लोकतांत्रिक नहीं है और सत्ता हाथ में आते ही उसका डंडा अपने विरोधियों पर चलने लगता है। फर्क यह है कि कोई डंडा थोड़ा कम चलाता है तो कोई ज्यादा चलाता है। केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो ईडी और सीबीआई के 65 फीसदी केस विपक्षी नेताओं के ऊपर थे। अब वही अनुपात बढ़ कर 95 फीसदी हो गया है।

Exit mobile version