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कोहली की विराट विदाई

विराट कोहली

विराटकोहली आंकड़ों के प्रभाव में भी सफल नेतृत्व के धनी रहे। सही है कि उनके ही आक्रामक रवैए ने क्रिकेट में अप्रत्याशित आशा का जुझारू जोश पैदा किया। टेलीविजन युग के खेल में लड़ते हुए दिखने की नई सत्ताई परिभाषा भी गढ़ी। मार्क टेलर ने माना कि कोहली का जूझना अब क्रोध में दिख रहा है तब खेल छोड़ना ही उनके आने वाले जीवन के लिए सही है।

खेलों को हार-जीत के अलावा खेलने वालों के जोश, ठसक और जुझारूपन के लिए भी देखना चाहिए।  कहा भी जाता है की खेल खिलाड़ी का चरित्र ही नहीं दर्शाते, उन्हें उजागर भी करते हैं। फिर जो खिलाड़ी हमें अपने खेल से, हावभाव व नाज-नखरे से प्रभावित करता है उसे देखने के लिए अपन लालायित रहते हैं।

उनके खेलने से जहां हमें उत्सव का आनंद मिलता है तो उनके खेल छोड़ने पर हम दुख से निराश भी होते हैं। फिर आनंद के जोश में हम उन खिलाड़ियों के सम्मान में विदाई समारोह करते हैं। इससे ही खेल संपन्न व समृद्ध होता है। और युवा उस खेल को खेलने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

मंगलवार रात मैनचेस्टर सिटी ने इंग्लिश प्रीमियर लीग का फुटबॉल मैच बोर्नमाउथ क्लब से जीत लिया। एक दशक से मैनचेस्टर सिटी के लिए मिडफील्ड में सफलता से शानदार खेलते रहे केविन डी ब्रुइन का आखिरी मैच था। मूल बेल्जियम के रहने वाले डी ब्रुइन अपनी विदाई में खुद के सफल खेल संस्मरणों की फिल्म-फुटेज, पत्नी और तीन बच्चों के साथ गर्व से भरे आंसुओं में देख रहे थे। खचाखच भरे घरेलू स्टेडियम में दर्शक उन्हीं का चेहरा पहने, संदेश लिए विदाई के गवाह बने।

विराट कोहली को सम्मान क्यों नहीं

हजारों दर्शकों ने डी ब्रुइन को सौम्य, शालीन और याद भरी भावनात्मक विदाई दी। पूरे स्टेडियम में अंधेरा कर के स्क्रीन पर खास लोग, साथी फुटबॉलर और परिवार के संदेश दुनिया भर के लिए चलाए, दिखाए गए। क्योंकि केविन डी ब्रुइन गजब के फुटबॉलर तो थे ही मगर वे शानदार चरित्र के सम्मान प्रिय इंसान भी रहे।

एतिहाद स्टेडियम में ही उनकी मूर्ति भी लगेगी। उनके सम्मान में कई अमूल्य यादगार उपहार दिए गए। सारा माहौल उनके प्रति चाहत में, सम्मान और लगाव में गमगीन दिखा। इतना की फुटबॉल के कई शानदार खिलाड़ी भी, और सबसे प्रसिद्ध, चर्चित कोच व मैनेजर पेप गार्डियोला की आंखों में भी आंसू थे। ‘किंग केव’ से प्रसिद्ध डी ब्रुइन ने सिटी से खेलते हुए दस साल में 19 खिताब जीते। मिडफील्ड में खेलते हुए सौ से ज्यादा गोल दागे। लेकिन कई सौ गोल करने में मदद के लिए अचूक, लाजवाब पास भी दिए।

दुनिया के सबसे बेहतरीन पास देकर खेल चलाने, मैच बनाने वाले फुटबॉलर हुए। अधिकार जमाते हुए कब्जा बनाने वाले जांबाज फुटबॉलर रहे। उनके सम्मान में हुई विदाई में अपन भी हावभाव देखने के लिए भावना में शामिल रहे। बस परेशान यह करता रहा कि क्रिकेट के महान बल्लेबाज विराट कोहली के लिए ऐसे सम्मान का मौका अपने को क्यों नहीं मिला? क्यों कोहली को उनके सबसे प्रिय प्रारूप टेस्ट क्रिकेट को यूं ही छोड़ देना पड़ा?

क्रिकेट टीम का जून में पांच टेस्ट मैच का संघर्ष भरा इंग्लैंड दौरा है। और उसमें अपने ‘किंग कोहली’ नहीं खेलने वाले। यह तो सभी के सामने है कि पिछले पांच सालों में विराट कोहली ने सिर्फ तीन टेस्ट शतक ही लगाए। जहां उनकी प्रति-पारी रन प्रतिशत 60 के आसपास थी वो अब 47 पर ठहर गयी है। लेकिन आस्ट्रेलियाई दौरे की असफलता की गाज सिर्फ उन पर ही नाहक गिरी। क्योंकि चल रहे आईपीएल में उनके बल्ले की लय, ताल और क्षमता बेजोड़ लग रही है।

माना जा रहा था कि विराट में तो अभी टेस्ट खेलने का मनोबल और दमखम बचा है। उनके बल्लेबाजी अनुभव से नयी भारतीय टीम खड़ी की जा सकती थी। क्योंकि जो भी युवा टीम बनेगी उसमें अनुभव की कमी रहने ही वाली है। और कोच गौतम गंभीर अपना अनुभव मैदान के बाहर ही साझा कर सकते हैं। जिस टीम का नेतृत्व कप्तान करता है वही सफल भी होती है। सत्ता के गंभीर और बाकी तो सहायतार्थ ही रहेंगे। लेकिन सत्ता का खेल ही है जो सिर चढ़ कर ही डोलता, बोलता है।

कोहली भी आंकड़ों के प्रभाव में सफल नेतृत्व के धनी रहे। सत्ता के चरम व अति दोनो पर भी रहे। सही है कि उनके ही आक्रामक रवैए ने अपनी क्रिकेट में अप्रत्याशित आशा का जुझारू जोश पैदा किया। टेलीविजन युग के खेल में लड़ते हुए दिखने की नई सत्ताई परिभाषा भी गढ़ी। आज बदली सत्ता में सब सकते में हैं। मार्क टेलर ने माना कि कोहली का जूझना अब क्रोध में दिख रहा है तब खेल छोड़ना ही उनके आने वाले जीवन के लिए सही है। बेशक कोहली का टेस्ट खेलना छोड़ना तो समय से होना ही था मगर सम्मान में विदाई भी होनी ही चाहिए थी। जो केन्द्रीकृत होती खेल सत्ता ने होने नहीं दिया।

सत्ता खेल की हो या राज की, दुर्भावना में उसका दुरुपयोग ही होता है। काश प्रेमानंद जी से कोहली दस साल पहले मिलते तो उनकी विदाई भी विराट होती। महान विराट को विदाई सलाम।

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Pic Credit: ANI

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