दादी और नानी के बनाए स्वाद में बीमारियां नहीं थी
हम तेज़ी से एक बीमार देश बनते जा रहे हैं। हम बीमारी को डाक्टरी इलाज से ठीक करने में लाखों रुपया गवां देते हैं ले...
हम तेज़ी से एक बीमार देश बनते जा रहे हैं। हम बीमारी को डाक्टरी इलाज से ठीक करने में लाखों रुपया गवां देते हैं ले...
बावज़ूद इस के कि मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कट्टर विचारधारा का घनघोर विरोधी हूं, मैं मानता हूं कि सं...
कुछ कहानियां हमें डराती नहीं हैं। वे हमें बेचैन करती हैं। डर कुछ देर का होता है। बेचैनी देर तक साथ चलती है। वह कहानी खत्...
आईआईटी जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे कम बोली वाले ठेकेदार को काम मिलने से लागत कम करने के लिए...
दिलचस्प है कि 1931 में जब आखिरी जातिवार जनगणना हुई थी तब 4147...
हिन्दू ग्रंथों की निन्दा करने वाले उसे शायद ही पढ़ते हैं। मनुस्मृति के राज्य-शासन संबंधी तीनों अध्याय गंभीर ज्ञा...
बुजुर्ग दुखी इसलिए हुए कि उनके जीवन का उद्देश्य ही गायब हो गया था। पहले पिता हर सुबह एक उद्देश्य के साथ उठते थे
वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की राष्ट्रवाद की भावनाओं को प्रतीकित करने का माध्यम है। यह ...
दिल्ली और फिर रांची के आंदोलन में शामिल छात्र-युवा भले, मोटे तौर पर, अलग-अलग सामाजिक वर्गों से आए हों और उनकी वर्गीय स्थ...
टाउन प्लानिंग में ‘हेरिटेज सेंसिटिव’ दृष्टिक...
'दिमागी नक्सल को आइसोलेट' करने और '...
लालकिले से 15 अगस्त 2026 का संबोधन एक साथ दो भारत दिखाता है। पहला वह भारत है जिसे सत्ता प्रस्तुत करना चाहती है
जिस समाज में मेहनत की जगह शॉर्टकट को और ईमानदारी की जगह ‘जुगाड़
सिर्फ सरकार को कोसना काफी नहीं। हमें खुद को भी आईना दिखाना होगा। अवैध निर्माण,