अगर बांग्लादेश और नेपाल की घटना नहीं हुई होती और जेन जी का जुमला नहीं चला होता तो हो सकता है कि सरकार इतनी परेशान नहीं होती। लेकिन पड़ौस में आंदोलन हो चुका है कॉकरोच का आईडिया तुरंत क्लिक हुआ। अमेरिका मे बैठे आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर अकाउंट बना दिया। निश्चित रूप से मजे मजे में दीपके ने यह काम किया और हिट हो गया। भारत में खाली बैठी कुढ़ती, बिसूरती जमात ने उसको फॉलो करना शुरू किया।
सोशल मीडिया में इसके फॉलोवरों की जमात इतनी तेजी से बढ़ी कि देश का मीडिया इसे विकल्प बताने लगा। अखबारों में खबरें छपने लगीं कि कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया में कांग्रेस औऱ भाजपा को पीछे छोड़ दिया। इसके कांग्रेस और भाजपा से ज्यादा फॉलोवर हो गए। सोशल मीडिया साइट्स पर बढ़ती संख्या और मीडिया में खबरों का ऐसा असर हुआ कि सरकार घबरा गई। घबरा कर सरकार ने इसे एक्स हैंडल पर पाबंदी लगवा दी। खबर है कि इसके इंस्टाग्राम हैंडल को भी प्रतिबंधित करने की तैयारी है, जिस पर फॉलोवर्स की संख्या दो करोड़ करीब पहुंच चुकी है।
और सरकार ने भारत की खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी को इसके पीछे लगा दिया। आईबी ने कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट होने वाली सामग्री का कथित तौर पर अध्ययन किया। उस अध्ययन के बाद आईबी ने सरकार को रिपोर्ट दी कि इसके हैंडल से जिस तरह की सामग्री पोस्ट की जा रही है उससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसके बाद जो नहीं कहा गया वह ये था कि अगर इस पर पाबंदी नहीं लगाई तो देश में विद्रोह की संभावना बन सकती है। नतीजतन सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बता कर इस पर पाबंदी लगाई। बताया जा रहा है की आईबी की रिपोर्ट सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास भेजी गई। सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी कानून 2000 की धारा 69 (ए) के आधार पर सोशल मीडिया कंपनी को निर्देश भेजा कि इसके हैंडल को निरस्त किया जाए।
सोचें, देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली प्रीमियम एजेंसी आईबी इन दिनों तिलचट्टों के पीछे पड़ी है। वह देख रही है कि सोशल मीडिया में वे लोग क्या पोस्ट कर रहे हैं। इतना ही नहीं स्थायी असुरक्षा भाव से घिरी मोदी सरकार के लोग घबराहट में हैं। जबकि हकीकत है कि यह कोई वास्तविक पार्टी नहीं बनी है। यहां तक कि कोई अराजनीतिक संगठन भी नहीं बना है। देश के अदंर लोगों का कोई ऐसा समूह भी नहीं है, जो किसी विचारधारा को लेकर आगे बढ़ रहा है। सरकार विरोध की बात भी सिर्फ सोशल मीडिया हैंडल्स तक ही है। यह एक वर्चुअल दुनिया है, जिसका हो सकता है कि वास्तविक दुनिया से कोई नाता न जुड़े। हो सकता है कि इसकी सारी गतिविधियां वर्चुअल दुनिया में चले और वहीं समाप्त हो जाए। धरातल पर कोई स्वरूप ही नहीं ले पाए।
इससे पहले जो आखिरी आंदोलन इस देश में हुआ था वह इंडिया अगेंस्ट करप्शन का था। उसमें हजारों, लाखों लोग सड़क पर उतरे थे। इस कॉकरोच जनता पार्टी का कोई वैचारिक आधार नहीं है, कोई संगठन नहीं है और न कोई आदमी सड़क पर उतरा है। विदेश में बैठा एक ऐसा व्यक्ति इसे चला रहा है, जिसकी बातें सुन कर ऐसा लगता है कि उसे किसी चीज का कोई अंदाजा नहीं है। उसने कॉकरोच शब्द सुन कर उसमें मौका देखा और एक सोशल मीडिया हैंडल बना दिया। इतने भर से सरकार घबरा गई। उस पर पाबंदी लगाने लगी। अगर सचमुच ऐसी कोई पार्टी बन जाए और लोग इसके झंडे लेकर सड़क पर उतरें तो सरकार क्या करेगी?
असल में यह सरकार का असुरक्षा बोध है, जिसका प्राथमिक कारण बांग्लादेश और नेपाल की घटना है। लेकिन इसके अलावा एक कारण यह भी है कि सरकार खुद भी वास्तविकताओं से परिचित है। खास कर देश की जो आर्थिक स्थिति है, बेरोजगारी की स्थिति है और लोगों के जीवन में जो बढ़ रहा आर्थिक दबाव है उसके बारे में सरकार को जानकारी है। तभी सरकार को ऐसा भी लग रहा होगा कि कहीं इन सबका मिला जुला असर यह न हो लोग सचमुच बगावत पर उतर जाएं। ध्यान रहे असुरक्षा बोध से ग्रसित नेता सबसे खतरनाक होता है। वह हर व्यक्ति से आशंकित रहता है, असहमति की हर आवाज को कुचलने का प्रयास करता है और किसी भी विद्रोह की संभावना को जन्म लेने से पहले खत्म करना चाहता है। हालांकि कई बार यह दांव उलटा भी पड़ता है, जैसे नेपाल में सोशल मीडिया पर पाबंदी का दांव उलटा पड़ा था। भारत में ऐसा होने की संभावना कम है। फिर भी सरकार ने सोचा होगा कि क्यों जोखिम लेना है।
पुनश्चः प्रत्यक्ष तो यह दिख रहा है कि सरकार तिलचट्टों से घबराई है और उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लेकिन हर चीज में साजिश देखने वाली एक जमात ऐसी भी है, जो कह रही है कि सब कुछ सरकार ही करवा रही है। चीफ जस्टिस के कॉकरोच वाले बयान से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के गठन तक। सबके पीछे एक योजना देखी जा रही है। कहा जा रहा है कि सरकार युवाओं के गुस्से और निराशा को एक दिशा देना चाहती है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनवाना चाहती है, जिसकी ओर युवा आकर्षित हों। इसका सीधा नुकसान विपक्ष को होगा, जो मौजूदा हालात का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।
