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भारत चंगा, सब अच्छा!

New Delhi, Nov 26 (ANI): Prime Minister Narendra Modi speaks during the virtual inauguration of the Safran Aircraft Engine Services India (SAESI) facility located at the GMR Aerospace and Industrial Park – SEZ, at Hyderabad, in New Delhi on Wednesday. (ANI Video Grab)

ऑस्ट्रेलिया, जापान, खाड़ी देश, अफ्रीका, फ्रांस, यूरोप, ब्रिटेन से लेकर अमेरिका, सभी चिंता में हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कोविड के बाद पहली बार राष्ट्र को संबोधित कर समय खराब होने की हकीकत बताई। वहीं पाकिस्तान, चीन, मलेशिया तीनों मिल कर ईरान से तेल टैंकरों की आवाजाही सुरक्षित करने की कूटनीति कर रहे हैं। ईरान-ओमान खाड़ी को अपनी जागीर बनाने, टोल वसूलने का प्रोटोकॉल सोच रहे हैं। पुतिन तेल रिफाइनरियों के रखरखाव के बहाने सप्लाई कम करने की बातें कर अपना भाव बढ़ा रहे हैं। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति जापान, दक्षिण कोरिया जाकर राष्ट्रपति ट्रंप की धौंस की काट की भूमिका बना रहे हैं। और आज सुबह ‘बीबीसी’ पर चर्चा में मालूम हुआ कि कैसे कच्चे तेल के ‘फ्यूचर’ बैरल दाम 140 डॉलर के पार हैं!

और पूरी दुनिया के सबसे बड़े आयातित गैस-तेल आश्रित 140 करोड़ लोगों का देश भारत क्या कर रहा है? बंगाल के चुनाव और हिंदू बनाम मुस्लिम वोट में खोया हुआ है! प्रधानमंत्री मोदी की सर्वोच्च चिंता विधानसभाओं के चुनाव जीतना है। वे इसकी उधेड़बुन में इस हद तक हैं कि 16 से 18 अप्रैल को संसद की फिर बैठक बुलाई है। लोकसभा में महिलाओं की सीटें आरक्षित कराएंगे! ताकि बंगाल की महिला मतदाता गैस सिलेंडर, ममता बनर्जी को छोड़ मोदी को वोट दें! इतना ही नहीं, प्रचार के ऐन समय में ममता बनर्जी के चुनावी प्रचार की सर्वे कंपनी पर भी ईडी के ताबड़तोड़ छापे! सो, अभी नहीं तो कभी नहीं के अंदाज में बंगाल, असम, केरल सभी चुनावी राज्यों में जीतने की जिद में सरकार यानी मोदीजी को चौबीसों घंटे खपे रहना।

भला किसलिए? राहुल गांधी, विपक्ष को पंक्चर करने के लिए। प्रधानमंत्री चुनाव सभाओं में कह रहे हैं कि राहुल गांधी जनता को उकसा रहे हैं! कैसे? इसलिए क्योंकि राहुल गांधी और ममता बनर्जी गैस सिलेंडर संकट से लेकर महंगाई, विदेश नीति, कूटनीति जैसे उन मसलों को हवा दे रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया चिंता में है। ये संसद और संसद के बाहर हल्ला करते हैं। मोदी के खिलाफ नारे लगाते हैं!

मतलब विपक्ष का हल्ला जनता को उकसाना है! लोगों से कह रहे हैं, मोदी हराओ, देश बचाओ! तभी पांच राज्यों के चुनाव मोदीजी की अग्निपरीक्षा हैं। सो, इन चुनावों से भाजपा बतलाएगी कि न केवल असम में जीते हैं, बल्कि रसोई की गैस के संकट से परेशान महिलाएं भी बंगाल में ममता को छोड़ मोदीजी को वोट दे रही हैं!

तय मानिए, दुनिया में चाहे जो हो, भारत का 2026-27 का वर्ष बेफिक्री का साल होगा। पूरा साल भगवा जश्न का होगा। भक्ति का, दर्शनों का होगा। आखिर इस साल बंगाल जीतने के बाद उत्तर प्रदेश भी तो जीतना है। इसलिए गैस-तेल-आर्थिकी से बड़ा चुनावी संकट है। भाजपा बंगाल, असम में हार जाए तो गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल, महंगाई, बेरोजगारी के वैश्विक हाहाकार का भारत में भी वह भभका बनेगा कि लोग भक्ति छोड़ सड़क पर उतर आएं।

इस मामले में मोदी जैसे चुनावी चिंता में हैं, वैसे उनके सखा ट्रंप भी हैं! अमेरिका में भी दिसंबर में संसद के मध्यावधि चुनाव हैं। तभी वे ताबड़तोड़ ईरान को पाषाण युग में धकेल कर खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकलने की जुगाड़ में हैं। यह अलग बात है कि अमेरिका लगातार फंसेगा। और ट्रंप का स्वर्णकाल भी वैसा ही होगा जैसा मोदीजी का है और होगा!

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