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कुछ करना नहीं, कुछ बचा भी नहीं!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कितना काम कर दिया! पिछले एक हफ्ते से केंद्र सरकार की ओर से और सभी राज्यों की सरकारों की ओर से बड़े बड़े विज्ञापन देकर कामों की सूची प्रकाशित की जा रही है। बड़े बड़े लोग अखबारों में लेख लिख कर बता रहे हैं कि मोदी सरकार ने कितना काम किया है। बड़े नेताओं ने दावा किया है कि मोदी पिछले 25 साल से हर दिन 18 घंटे काम कर रहे हैं, बिना कोई छुट्टी लिए। इस साल सात अक्टूबर को सार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे करेंगे। सात अक्टूबर 2001 को वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अंग्रेजी और हिंदी के अखबारों में लेख लिख कर बताया कि मोदी ने कितना काम किया है। उन्होंने तो यह भी बताया कि गुजरात में मोदी ने कितना काम किया है। हालांकि जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने नीतीश के साथ अपनी एक फोटो अखबारों में छपवा दी थी और नीतीश ने भाजपा नेताओं को दिया गया भोज रद्द कर दिया था। कोशी की भीषण बाढ़ के समय गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार को मदद की राशि भेजी थी को नीतीश कुमार ने वह राशि लौटा दी थी।

बहरहाल, अब सोचें, अगर कोई नेता 25 साल तक 18-18 घंटे काम करेगा तो उसके बाद करने को क्या बचा रह जाएगा? भाजपा और सहयोगी पार्टियों व नेताओं का दावा है कि मोदी को इतना काम इसलिए करना पड़ा क्योंकि पहले की सरकारों ने कुछ नहीं किया। अगर उन्होंने कुछ किया होता तो मोदी को इतना काम नहीं करना पड़ता। यह पहले के लोगों की अक्षमता थी। दावा किया गया है कि मोदी ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाला फिर भी 81 करोड़ लोगों को पांच किलो अनाज देना पड़ रहा है। सोचें, 106 करोड़ लोग घनघोर गरीबी में थे, जिनमें से 81 करोड़ अब भी पांच किलो अनाज ले रहे हैं। कुछ लोग उन 25 करोड़ लोगों की तलाश कर रहे हैं, जो गरीबी से निकले हैं। उनका पूछना है कि ये लोग गरीबी से निकल कर कहां गए?

खैर, अटल बिहारी वाजपेयी जिस समय प्रधानमंत्री थे उस समय बीएसपी यानी बहुजन समाज पार्टी का बहुत बोलबाला था लेकिन उसी समय एक दूसरी बीएसपी यानी बिजली, सड़क और पानी को विकास की राजनीति के एक विचार के तौर पर स्थापित किया गया। सड़क बनाने, गांव गांव बिजली पहुंचाने और पीने के पानी की व्यवस्था करने का दौर उस समय शुरू हुआ था। दुर्भाग्य से अब भी देश में इसी का दौर चल रहा है। अब भी सड़कें बन रही हैं और घर घर बिजली व पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। यह अलग बात है कि दिल्ली से सटे नोएडा और गाजियाबाद में घंटों बिजली की कटौती हो रही है और दिल्ली में का बड़ा हिस्सा पानी की कमी से जूझ रहा है। लेकिन सरकार को उससे मतलब नहीं है। सरकार का दावा है कि देश के जिन 18 हजार गांवों में बिजली पहुंचाने का काम पूरा नहीं हुआ था वह कर दिया गया है। यानी अब देश का कोई गांव, कस्बा या शहर नहीं है, जो बिजली से नहीं जुड़ा है। इसलिए अब उसमें कुछ करने की जरुरत नहीं है। बिजली की लाइन पहुंचा दी है तो बिजली भी आती जाती रहेगी। नल से जल पहुंचाने की भी व्यवस्था कर दी गई तो पानी भी आता जाता रहेगा।

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