Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

संसद, संविधान सब राजनीति साधने का मंच

लोकसभा में गुरुवार, 16 अप्रैल को महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक पेश किए गए और उन पर चर्चा शुरू हुई तो कुछ बहुत रोचक बातें सुनने को मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की नाटकीयता और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेता को दोस्त बनाने वाली बात अपनी जगह है। लेकिन कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा ने दो बहुत मार्के की बात कही। उन्होंने कहा कि चाणक्य जिंदा होते तो वे भी चौंक जाते। उनकी दूसरी बात यह थी कि राजनीति में कुटिल होना अपनी जगह लेकिन सत्ता बनाए रखने की महत्वाकांक्षा के लिए भी फैसले सही होने चाहिए। चाणक्य वाली बात उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लक्ष्य करके कही थी और कुटलिता वाली बात पूरी सरकार या सरकार चला रहे दोनों नेता यानी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए थी।

अगर बारीकी से इस पूरे बिल और प्रक्रिया को देखें तो पता चलेगा कि चुनावी फायदे के लिए कैसी कैसी कुटिलता की जा सकती है। सरकार ने अभी चल रहे चुनावों खास कर पश्चिम बंगाल के चुनाव में ममता बनर्जी को चुनौती देने के मकसद से अचानक महिला आरक्षण लागू करने का फैसला किया। यह भी नहीं सोचा गया कि लोग क्या कहेंगे? आखिर लोगों को इतनी बात को समझ में आएगी कि 2023 में एक कानून पास हुआ, जिसकी इतनी चर्चा हुई और इतना श्रेय लिया गया और अब उसी कानून को क्यों बदला जा रहा है, जबकि वह कानून लागू भी नहीं हुआ? लोग यह भी तो समझ ही रहे हैं कि जब विपक्ष ने सर्वसम्मति से महिला आरक्षण के लिए लाए गए नारी शक्ति वंदन कानून को पास कराया तो अब कैसे उसी विपक्ष को महिला आरक्षण का विरोधी बताया जा रहा है?

लेकिन सरकार को इन तार्किक सवालों से मतलब नहीं है और न इस बात की परवाह है कि लोग क्या सोचेंगे। मोदी और शाह दोनों को लग रहा है कि पहले कहा कि जनगणना और परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू करेंगे और लोगों को मनवा दिया कि सरकार महिलाओं के प्रति बहुत समर्पित है उसी तरह अब फिर मनवा देंगे कि नहीं जनगणना से पहले ही महिला आरक्षण लागू होना चाहिए। तभी पूरे देश में जबरदस्त प्रचार हुआ। केंद्र से लेकर अलग अलग राज्यों की भाजपा सरकारों ने महिला अथिकार, महिला सशक्तिकरण, आरक्षण आदि को लेकर खूब विज्ञापन दिए। देश को बताया गया कि अब समय आ गया है कि महिला आरक्षण लागू किया जाए। उसके बाद संसद में बिल पेश किया गया तो उस पर भाषण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे विपक्ष को क्रेडिट लेने का ब्लैंक चेक दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे तो क्रेडिट ले। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे विज्ञापन छपवा कर विपक्ष को क्रेडिट देंगे। हकीकत यह है कि विज्ञापन छपवा कर सरकार पहले ही क्रेडिट ले चुकी है।

Exit mobile version