दरअसल वैश्विक पैमाने पर भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई में पिछड़ गया है। सारी दुनिया में सबसे ज्यादा निवेश एआई में हो रहा है और सबसे ज्यादा पैसे एआई कंपनियों के शेयर में लग रहे हैं। भारत में कोई भी कंपनी ऐसी नहीं है। इसलिए भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकल कर ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में जा रहा है, जहां एआई औऱ सेमीकंडक्टर में बहुत बड़ा निवेश हुआ है और शेयर बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
मतलब तकनीकी बाजारों की ओर पैसा, पूंजी जा रही है। दिल्ली में एआई समिट के तमाशे और प्रधानमंत्री मोदी की हवाबाजी से दुनिया प्रभावित नहीं हुई। साथ ही ऊर्जा और तेल के संकट और वैश्विक कारणों से भी भारत के शेयर बाजार से पैसा निकला है। चूंकि भारत तेल और ईंधन के अन्य स्रोतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। इसलिए वैश्विक अनिश्चितताओं में निवेशक भारत के बाजार पर भरोसा नहीं कर रहे हैं।
हालांकि कई जानकार मान रहे हैं कि यह अस्थायी परिघटना है और वैश्विक स्तर पर शांति बहाली के बाद वापस पैसा आना शुरू हो जाएगा। लेकिन एआई में निवेश और चिप बाजार में भारत के पिछड़ने की परिघटना अस्थायी नहीं है। यह भारत की अपनी आर्थिक नीतियों और प्राथमिकताओं से जुड़ा मामला है। इसकी वजह से इस बाजार में भारत को पिछड़ा ही रहना है। तभी स्वाभाविक रूप से भारत के शेयर बाजार में बड़ा निवेश लौटने की संभावना कम दिख रही है।
