Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

प्रदर्शनकारियों को डराने का अभियान

छात्रों और युवाओं के आंदोलन से घबरा कर केंद्र सरकार ने उनकी मांगें तो मान लीं लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि उन मांगों को पूरी तरह से स्वीकार करने का सरकार का इरादा है। अब कई तरह के अगर मगर किए जा रहे हैं और दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी के नेता व अन्य परेशान हैं कि अब क्या करें। असल में प्रदर्शनकारियों की अनुभवहीनता का सरकार ने फायदा उठाया। सौरव दास और आशुतोष रांका को इससे पहले प्रदर्शन या सरकार के साथ समझौता वार्ता का कोई अनुभव नहीं था। इसलिए कांस्टीट्यूशन क्लब में दूसरी वार्ता से पहले जब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया और सरकार ने नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों पर से मुकदमे हटाने की सहमति दी तो दोनों छात्र नेता खुश हो गए और उन्होंने प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान कर दिया।

यह भी कहा जा रहा है कि सोनम वांगचुक की गैरहाजिरी में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दिपके को भी आंदोलन खत्म करने की जल्दी थी। इसलिए उन्होंने जीत का ऐलान किया और उसके बाद 24 घंटे में सरकार ने जंतर मंतर से इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के नामोनिशान मिटा दिए। अब समस्या यह आ रही है कि अभी तक न तो मुआवजा देने के मामले में कोई पहल हुई है और न छात्रों पर से बिना शर्त मुकदमे वापस हुए हैं। उलटे सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई शर्त के बाद अब सरकार भी आनाकानी कर रही है। अभी 18 साल से कम उम्र के ऐसे प्रदर्शनकारियों की रिहाई हो रही है, जिनके ऊपर पहले से कोई मुकदमा नहीं है। सवाल है कि 18 साल से ऊपर के उन लोगों का क्या होगा, जिनके ऊपर पहले से कोई मुकदमा नहीं चल रहा है? ध्यान रहे बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में सरकार ने आदेश जारी किया था कि 26 जुलाई की शाम तक जितने लोगों पर मुकदमे हुए थे वो सब वापस होंगे और प्रदर्शनकारियों की जेल से रिहाई होगी लेकिन दो दिन बाद तक रिहाई नहीं हुई।

अब खबर है कि सरकार ने पुलिस को निर्देश दिया है कि आंदोलन में शामिल सभी लोगों के चेहरे पहचाने जाएं और उनकी जानकारी जुटाई जाए। खासतौर से ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है, जो नेतृत्व कर रहे थे यानी ज्यादा मुखर थे और आंदोलन की व्यवस्था का हिस्सा थे। इतना ही नहीं प्रदर्शन की जगह पर होर्डिंग्स और पोस्टर लेकर जो लोग खड़े थे उनकी पहचान करके भी जानकारी जुटाई जा रही है। दिल्ली के अलग अलग थानों में तस्वीरें भेजे जाने की खबर है। यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लिखने वालों की अलग से और ज्यादा सघन तरीके से तलाश हो रही है। पुलिस के सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि सोशल मीडिया में जिन लोगों ने आपत्तिजनक पोस्ट की उनकी भी सूची बन रही है। उसमें ऐसे सोशल मीडिया हैंडल्स को खोजा जा रहा है, जहां से पोस्ट की शुरुआत हुई थी। हैरानी नहीं होगी अगर आने वाले दिनों में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया जाए। ध्यान रहे पिछले दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल संसद में गए थे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। डोवाल के संसद जाने का वीडियो ऐसे वायरल कराया गया, जैसे अब प्रदर्शनकारियों की खैर नहीं। आईबी चीफ और गृह सचिव भी संसद में अमित शाह से मिले। कहा जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों में आपराधिक छवि वाले कुछ ऐसे लोगों के नाम तलाशे जा रहे हैं, जिनके नाम की पहचान से राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी साजिश की कहानी बनाई जा सके।

Exit mobile version