भाजपा की राष्ट्रीय टीम के गठन और सरकार में फेरबदल की अटकलों के बीच चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी का संसदीय बोर्ड भी बदलेगा। यह फैसला करने वाली भाजपा की सर्वोच्च ईकाई है। हालांकि इसकी बैठकों की खबर तभी आती है जब किसी राज्य में चुनाव होने वाले होते हैं और उम्मीदवारों के नाम तय होने वाले होते हैं या चुनाव के बाद सीएम के नाम का फैसला होना होता है। संसदीय बोर्ड को लेकर कई तरह की चर्चा है। बताया जा रहा है कि पिछली बार जितने लोगों को रखा गया था उन सबको हटाया जा सकता है। पिछली बार जब फेरबदल हुई थी तब बीएस येदियुरप्पा, सत्यनारायण जटिया, इकबाल सिंह लालपुरा, के लक्ष्मण आदि को शामिल किया गया था। इस बार ये सब हटाए जा सकते हैं।
पिछली बार असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को भी इसमें शामिल किया गया था। पता नहीं वे रह पाएंगे या नहीं। गौरतलब है कि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष संसदीय बोर्ड का पदेन अध्यक्ष होता है। उसके अलावा अगर पार्टी सरकार में है तो प्रधानमंत्री इसके पदेन सदस्य होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री भी इसके सदस्य होते हैं और सभी पूर्व अध्यक्षों को इसमें रखने की परंपरा थी। लेकिन नितिन गडकरी अपवाद हैं, जिनको इसमें जगह नहीं मिली है। इसका अर्थ है कि पूर्व अध्यक्ष बाहर भी रखे जा सकते हैं। पूर्व अध्यक्ष के नाते राजनाथ सिंह, अमित शाह और जेपी नड्डा इसके सदस्य हैं। अलग अलग राज्यों के कई वरिष्ठ नेता संसदीय बोर्ड में शामिल होने की कोशिश में लगे हैं।
