पिछले दिनों दिल्ली पुलिस ने अपने अधिकारियों और जवानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। यह एडवाइजरी प्रदर्शनकारियों से और खास कर युवा व छात्र प्रदर्शनकारियों यानी ‘जेन जी’ से निपटने के लिए तैयार की गई है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली पुलिस के जवानों को अपवने चेहरे पर गुस्सा और आक्रामकता नहीं लानी है क्योंकि यह युवाओं और छात्रों के लिए खाद पानी की तरह है। कहा जा रहा है कि केंद्रीय एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस के लिए यह एडवाइजरी तैयार की है। इसे देख कर ऐसा लग रहा है, जैसे केंद्रीय एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों को छात्र व युवा से ज्यादा रीलबाज के रूप में देखा है।
तभी एडवाइजरी चेहरे पर गुस्सा नहीं लाने की सलाह दी गई है। पुलिस मान रही है कि अगर अगर वे गुस्सा दिखाएंगे तो प्रदर्शनकारी उनकी वीडियो बना कर उसे वायरल करेंगे, जिससे पुलिस की बदनामी होगी और आंदोलनकारियों का समर्थन बढ़ेगा। केंद्रीय एजेंसियों की ओर से जो मानक संचालन प्रक्रिया तय की गई है उसमें कहा गया है कि पुलिस वालों का गुस्सा ‘जेन जी’ के लिए कंटेंट होगा। यह बी कहा गया कि पुलिस के अधिकारी और जवान मान कर चलें कि हर समय कैमरा चालू है। इसलिए कभी भी कोई प्रतिक्रिया न दें। यहां तक कहा गया है कि पुरुष पुलिसकर्मी महिला प्रदर्शनकारियों से दूर रहें। सोचें, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने युवा व छात्र प्रदर्शनकारियों को क्या बना दिया है? पुलिस लिए वे रीलबाज हैं, कंटेंट बनाने वाले हैं और महिला प्रदर्शनकारी पुलिस को किसी मामले में फंसा सकती हैं।
