उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेताओं की ओर से दिए जा रहे बयानों से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव नाराज हैं। वे खासतौर से दो नेताओं से नाराज हैं। एक तो सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद हैं और दूसरे कांग्रेस के नए बने प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम हैं मसूद लगातार दबाव बना रहे हैं कि जल्दी सीट बंटवारा हो और कांग्रेस को पहले से ज्यादा सीटें मिलें। दूसरी ओर राजेंद्र पाल गौतम ने कह दिया कि कांग्रेस डेढ़ सौ कम सीट नहीं लड़ेगी। ध्यान रहे 2017 में दोनों पार्टियां एक साथ लड़ी थीं तो अखिलेश ने सरकार में होने के बावजूद कांग्रेस के लिए एक सौ से ज्यादा सीट छोड़ी थी। लेकिन नतीजों में कांग्रेस सात और सपा 47 सीटों पर जीती। इस बार अखिलेश अकेले कम से कम साढ़े तीन सौ सीट लड़ना चाहते हैं।
जानकार सूत्रों का कहना है कि बिहार में तेजस्वी यादव ने जो गलती की वह गलती अखिलेश नहीं दोहराना चाहते हैं। उनको पता है कि वे ज्यादा सीट लड़ेंग तो ज्यादा जीतेंगे, जबकि कांग्रेस को ज्यादा सीट देंगे तो दोनों हारेंगे। जानकार सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव ने करीब साढ़े तीन सौ सीटों पर उम्मीदवारों की छंटनी का काम भी कर लिया है। हालांकि कहा जा रहा है कि वे इससे कुछ कम सीटें लड़ने को भी तैयार हो जाएंगे। उनका पहला प्रस्ताव कांग्रेस को 60 सीट देने का है। दूसरा प्रस्ताव हर लोकसभा सीट में एक विधानसभा सीट यानी 80 सीटों का है और तीसरा प्रस्ताव 2024 में लड़ी 17 लोकसभा सीटों के हिसाब से प्रति सीट पांच यानी 85 सीटों की प्रस्ताव है। सपा की ओर से कहा जा रहा है कि यह अधिकतम है। इस बार वह कांग्रेस को तीन अंकों में सीट नहीं देगी। तभी राजेंद्र पाल गौतम के डेढ़ सौ सीट मांगने का कोई आधार नहीं है। जानकार सूत्रों का कहना है कि अखिलेश को यह पता चला है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं के कहने पर गौतम ने ज्यादा सीटों की मांग रखी है। इससे वे ज्यादा भड़के और ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक से दूरी बनाई।
