बिहार में जब शाहनवाज हुसैन उद्योग मंत्री बने थे तब जो औद्योगिक विकास हुआ उसमें मुख्य रूप से इथेनॉल की फैक्टरियां लगीं। एक तरफ देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का अभियान चल रहा था तो दूसरी ओर बिहार में उसकी फैक्टरी लग रही थी। ध्यान रहे बिहार में मध्य प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा मक्का होता है। केंद्र सरकार का नियम है कि इथेनॉल बनाने में 60 फीसदी मक्का और 40 फीसदी चावल का इस्तेमाल किया जा सकता है। बिहार में इन दोनों फसलों की बहुतायत में पैदावार होती है। इसलिए इथेनॉल की फैक्टरी लगाने की होड़ मची और तत्काल इसका लाभ भी दिखने लगा।
लेकिन अब अचानक संकट आ गया है। पेट्रोलियम कंपनियों ने इथेनॉल की मांग आधी कर दी है। इस वजह से बिहार में फैक्टरियों को उत्पादन घटना पड़ा है। फैक्टरी मालिकों का कहना है कि आधी क्षमता पर फैक्टरी नहीं चलाई जा सकती है। बिहार के इथेनॉल प्लांट मालिकों की समस्या यह है कि बिहार में शराब बंदी है इसलिए उनको इथेनॉल की सप्लाई सिर्फ पेट्रोलियम कंपनियों को ही करनी है। बताया जा रहा है कि बिहार के सामने यह संकट गुजरात के कारण आया है। पेट्रोलियम कंपनियों ने अब इथेनॉल का ऑर्डर गुजरात की फैक्टरियों को बढ़ा दिया है। इससे बिहार में ऑर्डर कम हुए हैं। सोचें, तमाम हाई एंड प्रोडक्ट्स की फैक्टरियां तो गुजरात में लग ही रही हैं। अब इथेनॉल की सप्लाई भी वही से होगी।
