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भाजपा में ब्लेम गेम शुरू

तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजों के बाद भाजपा में ब्लेम गेम शुरू हो गया है। बांकीपुर में किसने उम्मीदवार का चयन कराया, किसने अमुक आदमी की टिकट कटवाई, किसने प्रचार में काम नहीं किया, किसने भितरघात किया इस पर बहस छिड़ी है। जानकार सूत्रों का कहना है कि पटना की बांकीपुर सीट को लेकर पार्टी आलाकमान को भरोसा दिलाया गया था कि भाजपा चुनाव जीत जाएगी। यह कहा गया था कि जीत का अंतर भले थोड़ा कम होगा लेकिन भाजपा हारेगी नहीं। यह कहा जा रहा था कि नीरज सिन्हा जैसे साधारण कार्यकर्ता से प्रशांत किशोर को हरवा दिया जाएगा तो प्रशांत का संकट हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। तभी जब प्रशांत किशोर को लगभग 50 फीसदी वोट मिल गए और वे करीब 20 हजार वोट के अंतर से जीते तो दिल्ली में बड़ी नाराजगी हुई। कई नेताओं से जवाब तलब किया गया है।

कहा जा रहा कि सारे जिम्मेदार नेता पल्ला झाड़ रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे से बांकीपुर सीट खाली हुई थी तभी सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनकी बनती है। लेकिन उनके करीबियों का कहना है कि उम्मीदवार उनकी पसंद का नहीं था। उन्होंने पहले अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को उम्मीदवार चुना था। हालांकि कई तरह के विवादों की खबर आई तो उन्होंने नाम वापस ले लिया। कहा जा रहा है कि उसके बाद पार्टी आलाकमान ने खुद उम्मीदवार तय किया। स्थिति यह है कि बांकीपुर विधानसभा सीट के अंदर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद का घर आता है, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का घर है, प्रदेश सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव का घर है और इन सभी नेताओं के घर की बूथ पर भी भाजपा का उम्मीदवार हार गया।

प्रत्याशी नीरज सिन्हा अपने घर की बूथ पर भी हार गए। बताया जा रहा है कि कायस्थ समाज के लोगों ने भी उनको वोट नहीं दिया। सोचें, भाजपा ने कायस्थ जाति से आने वाले नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है और संभवतः पहली बार ऐसा हुआ है कि राजधानी पटना, जिसे कायस्थों की राजधानी भी कहते हैं वहां से कोई कायस्थ विधायक नहीं है। भाजपा ने कुम्हरार सीट पहले ही कायस्थ से लेकर वैश्य को दे दी थी और अब बांकीपुर सीट भी हाथ से निकल गई।

बिहार में कहा जाता है कि अगर 243 में भाजपा एक ही सीट जीतेगी तो वह सीट बांकीपुर की होगी। तीन लाख 80 हजार वोट वाले इस क्षेत्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के सामाजिक समीकरण का करीब तीन लाख वोट है। इसके बावजूद भाजपा बुरी तरह से उस सीट पर हारी है। अब आरोप लग रहा है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने प्रशांत किशोर की मदद की। कुछ लोग कह रहे हैं कि उम्मीदवार का चयन दिल्ली से किया गया था तो दिल्ली जाने।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ज्यादा जिम्मेदारी इसलिए नहीं बनती है क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट है और वे खुद चुनाव का जिम्मा संभाल रहे थे। सम्राट चौधरी प्रचार भी किया और रोड शो भी किया। साथ ही यह सुनिश्चित किया कि लव कुश यानी कोईरी, कुर्मी का वोट भाजपा को मिले। उसमें वे कामयाब रहे। भाजपा को सबसे बड़ा नुकसान सवर्ण जातियों के वोट का है। इसके लिए भी केंद्र को जिम्मेदार बताया जा रहा है। प्रदेश भाजपा के नेता खुल कर कह रहे हैं कि यूजीसी के दिशानिर्देश के कारण सवर्ण नाराज थे। वह भी केंद्र सरकार का ही काम है और जंतर मंतर पर छात्रों के ऊपर लाठी चलवाना भी केंद्र का ही काम है, जिसका नुकसान हुआ। सो, बांकीपुर के नतीजे के बाद भाजपा के अंदर कई तरह के आरोप प्रत्यारोप चल रहे हैं।

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