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  • भाजपा के बड़बोले अध्यक्ष ने नुकसान किया

    महाराष्ट्र में भाजपा के नेता लातूर के झटके को बड़ा मान रहे हैं। लातूर में पिछली बार भाजपा जीती थी लेकिन इस बार वह हार कर बाहर हो गई है और कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की है। इसका कारण महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का दिया गया बड़बोला बयान है। चव्हाण ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था, जिसका असर इस क्षेत्र में देखने को मिला। लोगों ने अपने प्रिय नेता दिवंगत विलासराव को श्रद्धांजलि देने के लिए जम कर वोटिंग की और भाजपा को हराया। असल में चव्हाण ने अपनी...

  • महाराष्ट्र में भाजपा का परचम

    मुंबई। पंचायत चुनावों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले महायुति ने महाराष्ट्र के शहरी निकाय चुनावों में भी परचम लहराया है। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी सहित राज्य के 29 नगर निगमों के लिए हुए चुनाव में महायुति ने 23 निगमों में बड़ी बढ़त हासिल की है। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने दावा किया है कि 25 शहरों में भाजपा गठबंधन का मेयर बनेगा। इनमें से दो शहरों में भाजपा की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिव सेना का मेयर हो सकता है, जबकि एक शहर में अजित पवार की पार्टी का मेयर संभव है। सबसे...

  • सीपीसी से क्या सीख रही है भाजपा

    नफरत और प्यार का रिश्ता बहुत सुना गया होगा लेकिन चीन के साथ भारत का रिश्ता नफरत और जरुरत का है। चीन से नफरत भी है और उसकी जरुरत भी है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने राहुल गांधी के चीन के राजदूत से मिलने की घटना को आसमान टूट पड़ने जैसी घटना माना था। उसके लिए पूरी कांग्रेस पार्टी को देशद्रोही ठहराया गया। कांग्रेस पार्टी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीसी के साथ एक एमओयू साइन हुआ था, जिसे लेकर भाजपा ने बड़ा नैरेटिव खड़ा किया। लेकिन अब खुद भाजपा नेता चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल से...

  • भाजपा, जदयू में शह मात का खेल

    बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यू के बीच शह मात का खेल चल रहा है। भाजपा इंतजार में बैठी है कि नीतीश कुमार सेहत के हवाले रिटायर हों तो भाजपा का सीएम बने और दूसरी ओर नीतीश कुमार कड़ाके की ठंड में समृद्धि यात्रा पर निकल गए। वे पूरे प्रदेश की यात्रा करेंगे। भाजपा का इंतजार लंबा होता जा रहा है। इस बीच जनता दल यू के नेताओं ने अपने विधायकों की संख्या बढ़ा कर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दांव खेलने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि भाजपा नेता इस गेम से परिचित हैं इसलिए...

  • ममता और भाजपा दोनों आयोग से नाराज

    यह कमाल की बात है लेकिन पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रही है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ साथ भाजपा भी चुनाव आयोग से नाराज है। भाजपा के नेता भी ताल ठोक रहे हैं कि चुनाव नहीं होने देंगे। हालांकि यह कोई डिजाइन भी हो सकता है, जिसका मकसद ऐसे हालात पैदा करना हो, जिसमें चुनाव टल जाए। अगर मतदाता सूची के विशेष गहन  पुनरीक्षण यानी एसआईआर की गड़बड़ियों के बहाने अगर चुनाव टलता है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ेगा और भाजपा के बहुत से नेता ऐसा मानते हैं कि बिना राष्ट्रपति शासन लगाए बंगाल...

  • बीएमसी में भाजपा जीतेगी?

    मुंबई। विधानसभा चुनाव में भारी भरकम जीत हासिल करने के बाद अब बृहन्नमुंबई महानगर निगम यानी बीएमसी में भी भाजपा गठबंधन को बड़ी जीत मिलने का अनुमान है। 227 सदस्यों की बीएमसी में चुनाव के बाद आए एक्जिट पोल के अनुमानों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति को पूर्ण बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। दो एक्जिट पोल अनुमानों में महायुति को 138 सीटें तो एक एक्जिट पोल में डेढ़ सौ सीट मिलने का अनुमान जताया गया है। बहुमत का आंकड़ा 114 सीटों का है। अगर नतीजे इसी लाइन पर आते हैं तो 25 साल के बाद बीएमसी पर...

  • चीनी नेताओं से क्यों मिले भाजपा, आरएसएस के नेता?

    कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों और भाजपा पर किए जा रहे हमलों को छोड़ दें तब भी सवाल है कि आखिर भाजपा के नेता और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पदाधिकारी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से क्यों मिले? भारत के दौरे पर आए सीपीसी के प्रतिनिधिमंडल से पहले भाजपा नेताओं की बैठक पार्टी मुख्यालय में हुई, जिसमें भाजपा के महासचिव अरुण सिंह शामिल हुए। इसके बाद संघ के कार्यालय में दत्तात्रेय होसबाले के नेतृत्व में संघ का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला। ऐसे समय में जब चीन के साथ भारत के संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं, इस मुलाकात...

  • बंगाल में भाजपा के पास सिर्फ नैरेटिव है

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले माहौल पूरा गरम है। केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने आजमाए हुए दांव के तौर पर चुनाव से ठीक पहले प्रदेश की भाजपा विरोधी पार्टी यानी तृणमूल कांग्रेस को केंद्रीय एजेंसियों के दम पर परेशान करने लगी है तो दूसरी ओर ममता बनर्जी अपनी आदत के मुताबिक सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रही हैं और टकराव को नए मुकाम तक ले जा रही हैं। लेकिन अगर वस्तुनिष्ठ तरीके से देखें और पश्चिम बंगाल में भाजपा की ताकत व कमजोरी का आकलन करें तो पता चलेगा कि ताकत के नाम पर भाजपा के...

  • चीन को लेकर भाजपा पर कांग्रेस का निशाना

    नई दिल्ली। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीसी के प्रतिनिधिमंडल से भाजपा नेताओं की मुलाकात पर कांग्रेस ने निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा है कि दोनों के बीच कौन सा गुप्त समझौता हुआ है? एक तरफ चीन गिलगित बाल्टिस्तान के इलाके में शक्शगाम घाटी को अपना बता रहा है और दूसरी ओर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भारत आकर भाजपा मुख्यालय में जा रहे हैं और भाजपा के नेताओं से मिल रहे हैं। गौरतलब है कि राहुल गांधी की चीनी कम्युनिस्ट नेताओं से मुलाकात पर आज तक भाजपा आरोप लगाती थी कि कांग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में...

  • बंगाल में भाजपा का चेहरा कौन?

    यह लाख टके का सवाल है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी किसको चेहरा बना कर चुनाव लड़ेगी। सामने से ममता बनर्जी की चुनौती है और यह सबको पता है कि भाजपा के पास उनसे मुकाबले के लिए कोई चेहरा नहीं है। तभी भाजपा के नेता अनौपचारिक बातचीत में दावा करते हैं कि चेहरा तो दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुकाबले के लिए भी नहीं था लेकिन भाजपा ने उनको हरा दिया। जब हर्षवर्धन और किरण बेदी का चेहरा था तब भाजपा नहीं जीती। लेकिन जब बिना चेहरे के लड़ी तो जीत गई। हालांकि यह लॉजिक पश्चिम बंगाल में...

  • न सफेद झक्क, न काली कट्ट

    एक प्रधानमंत्री जी मानते हैं कि उन की निर्णयात्मक क्षमता अभूतपूर्व है, अद्भुत है और सटीक है। सो, वे बिना किसी से सालह-मशवरा करे निर्णय लेते हैं और सब पर थोप देते हैं। उन्हें इस से कोई लेनादेना ही नहीं है कि उन का फ़ैसला कितना अर्थवान है और कौन क्या सोचेगा?... इसलिए इसी में बेहतरी है कि जो बताया जा रहा है, उसे चुपचाप मान लीजिए। नहीं भी मानेंगे तो कर क्या लेंगे? क्या भारत विश्वगुरु बन गया है? क्या भारत महाशक्ति बन गया है? क्या भारत दुनिया की चौथी सब से बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है? क्या भारत...

  • केरल में पहली बार लेफ्ट और कांग्रेस को चुनौती

    पांच साल बीत जाने के बाद भी कांग्रेस यह नहीं समझ पाई है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में वह कैसे हारी। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य की 20 में से 19 सीटों पर जीत हासिल की। राहुल गांधी अमेठी की पारंपरिक सीट से हार गए थे लेकिन केरल की वायनाड सीट से रिकॉर्ड वोटों से जीते। वे दो साल केरल की राजनीति में सक्रिय भी रहे लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह से चुनाव हार गई। कांग्रेस के नेता आजतक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे कि आखिर केरल में हारे कैसे। यह गुत्थी...

  • श्रीलेखा को भाजपा ने धोखा दिया

    उत्तर भारत में ज्यादातर लोग आर श्रीलेखा का नाम नहीं जानते होंगे। वे केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं और वे केरल की पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी रही हैं। वे भारतीय जनता पार्टी की राजनीति करती हैं। पिछले दिनों केरल के स्थानीय निकायों के चुनाव में सबसे ज्यादा जिस नतीजे की चर्चा हुई थी वह तिरूवनंतपुरम शहरी निकाय में भाजपा की जीत की थी। पहली बार तिरूवनंतपुरम के 101 वार्डों में से 50 में भाजपा जीती। पहली बार केरल के किसी शहर में भाजपा का मेयर बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद चिट्ठी लिख कर इस जीत के लिए...

  • बंगाल में महिला वोट की चिंता में भाजपा

    बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने महिलाओं को मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपए देने शुरू किए तो राज्य में पूरा राजनीतिक परिदृश्य बदल गया था। उस समय बिहार की बेलागंज सीट से एक राजद नेता का एक वीडिया वायरल हुआ था, जिसमें दिल्ली से गए एक बड़े पत्रकार से बातचीत में कह रहे थे कि घर की महिला कैसे परिवार से बाहर जाकर नीतीश कुमार को वोट करेगी। अगर महिला ने नीतीश को वोट करने की सोची तो उसकी पिटाई होगी। इस वीडियो ने राजद को बहुत नुकसान किया।...

  • संघ और भाजपा में क्या है संबंध?

    सभी  बातों की बारीकियों को समझे बगैर न तो आरएसएस को समझा जा सकता है, न भारतीय जनता पार्टी को समझा जा सकता है और न दोनों संगठनों के संबंधों को समझा जा सकता है। बहुत अच्छा संयोग है जो संघ प्रमुख ने भी अपने व्याख्यानों से भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया है तो संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने भी समस्त भ्रांतियों को दूर किया है। आशा है कि इससे आरएसएस और भाजपा को समझने की दृष्टि स्पष्ट होगी। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस की स्थापना के एक सौ वर्ष पूरे हुए हैं। यह अवसर इस सांस्कृतिक और...

  • भागवत क्यों दूरी दिखा रहे भाजपा से

    राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर संघ और भाजपा की दूरी बताई है। यह हैरानी की बात है कि बिना किसी संदर्भ के अचानक उन्होंने कहना शुरू किया है कि भाजपा के नजरिए से आरएसएस को देखने की जरुरत नहीं है। यह बात पिछले दिनों उन्होने कोलकाता में कही थी, जहां वे संघ के एक सौ साल पूरे होने के मौके पर चल रहे व्याख्यान की शृंखला में भाषण देने गए थे। अब दो हफ्ते के भीतर उन्होंने फिर कहा है कि भाजपा के नजरिए से संघ को देखने की जरुरत नहीं है।...

  • अभिषेक की चुनाव आयोग और भाजपा को चुनौती

    पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर सीट के सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी हाल ही में चुनाव आयोग को चुनौती देकर गए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की बैठक में सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त से पंगा किया और कहा कि चुनाव आयुक्त नॉमिनेटेड हैं, जबकि वे इलेक्टेड हैं। वे जब चुनाव आयोग पहुंचे थे तो उन्होंने गेट के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती देखी थी, जिसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि अभी तो अभिषेक बनर्जी आए हैं, जब ममता बनर्जी आएंगी तब क्या होगा? अब उन्होंने यह चुनौती दी है कि चाहे जितना भी एसआईआर करा लो...

  • शिंदे को बचाए रखना चाहती है भाजपा

    महाराष्ट्र में जब से देवेंद्र फड़नवीस मुख्यमंत्री और एकनाथ शिंदे उनके उप मुख्यमंत्री बने हैं तब से अनगिनत बार यह अटकल सुनने को मिली कि शिंदे की पार्टी टूटेगी। उनके मंत्रियों की अनदेखी किए जाने की खबरें भी कई बार आईं। हर जब ऐसी खबरें आती हैं तो शिंदे दिल्ली भागते हैं और दिल्ली से लौटने के बाद सब ठीक हो जाता है। चर्चा थोड़े दिन के लिए थम जाती है। तभी कहा जाता है कि महाराष्ट्र भाजपा के नेता खास कर फड़नवीस एंड कंपनी शिंदे की पार्टी को निपटाना चाहती है। उनका मानना है कि शिंदे को जो भूमिका...

  • भाजपा को रोकने के लिए पवार परिवार एकजुट

    भारतीय जनता पार्टी के नेता और सोशल मीडिया में उसके इकोसिस्टम के लोग इस बात पर मजे ले रहे हैं कि शऱद पवार और अजित पवार की पार्टी एक हो गई। वे खुश हो रहे हैं कि शरद पवार ने भी महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव के बहाने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को छोड़ दिया। वे इसी बहाने ‘इंडिया’ ब्लॉक के भविष्य पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन असलियत यह है कि शरद पवार और अजित पवार ने इसलिए हाथ मिलाया है ताकि अपने असर वाले इलाके में भाजपा को पैर जमाने से रोका जा सके है। असल...

  • सत्ता न हो तो कैसे लड़ेंगी पार्टियां?

    यह लाख टके का सवाल है कि अगर किसी पार्टी के पास सत्ता नहीं है तो वह कैसे राजनीति करेगी और कैसे चुनाव लड़ेगी? सोचें, एक समय सत्ता में होना चुनाव में असफल होने का आधार बनता था लेकिन अब सत्ता में होना चुनाव जीतने की गारंटी बनता जा रहा है। एंटी इन्कम्बैंसी से प्रो इन्कम्बैंसी का यह सफर एक अलग व्यापक विश्लेषण की मांग करता है। लेकिन अभी तात्कालिक विचार का मसला पार्टियों के लिए राजनीति और चुनाव मैदान के लगातार असमान होते जाने का है। हाल में कई मीडिया समूहों ने पार्टियों को मिलने वाले चंदे का ब्योरा...

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