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सीबीएसई के चेयरमैन का संसदीय समिति को जवाब

New Delhi, Apr 04 (ANI): Opposition uproar in the Lok Sabha over the Waqf (Amendment) Bill 2025 during the Budget session of Parliament, in New Delhi on Friday. (ANI Photo/Sansad TV)

दुनिया के जिन देशों में संस्थाओं को संपूर्ण स्वायत्तता मिली हुई है वहां भी संस्थाएं संसद के सामने जवाबदेह होती हैं। अमेरिका जैसे देश में हर संस्था के प्रमुख को अपनी संस्था द्वारा किए गए काम का जवाब सीनेट की कमेटी के सामने देना होता है। संबंधित विषय की सीनेट समिति किसी को भी तलब कर सकती है। वहां पेश नहीं होना या गलत जानकारी देना बहुत भारी पड़ता है। भारत में भी पहले संसदीय समितियों का महत्व होता था। लेकिन अब इस सरकार में संसदीय समितियों का महत्व शून्य कर दिया गया है।

तभी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की ओर से कहा गया है कि सीबीएसई के चेयरमैन संसदीय समिति के सामने पेश होने और उसको जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं। सोचें, संसद की सबसे महत्वपूर्ण लोक लेखा समिति यानी पीएसी ने सीबीएसई की हाल की गड़बड़ियों को लेकर चेयरमैन लोखंडे प्रशांत सीताराम को तलब किया था। लेकिन शिक्षा मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने समिति को बताया है कि सीबीएसई के चेयरमैन कमेटी के सामने पेश होने और जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं क्योंकि सीबीएसई एक स्वायत्त संस्था है और उसकी फंडिंग सरकार की ओर से नहीं होती है। इस पर विवाद हुआ तो विनीत जोशी ने बयान वापस लिया और कहा कि सीबीएसई इस मसले पर कानून मंत्रालय की राय लेगा। लेकिन उनके बयान से जाहिर हो गया कि सरकार के मंत्रालय संसदीय समितियों के बारे में क्या सोचते हैं।

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