कांग्रेस के लिए बहुत मुश्किल है। किसी तरह से पार्टी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर तैयार करके लॉन्च करना चाहती है तब तक कोई न कोई नया दावेदार खड़ा हो जाता है। प्रधानमंत्री पद के नए दावेदार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय हैं। उनकी पार्टी चाहती है कि अगले चुनाव में अखिल भारतीय स्तर पर विजय का चेहरा दिखाया जाए। अब यहां कांग्रेस की दोहरी समस्या हो गई है। एक समस्या राहुल गांधी की दावेदारी को मिलने वाली चुनौती है तो दूसरी समस्या यह है कि दक्षिण भारत में कांग्रेस की बजाय लोग विजय की पार्टी को वोट दे देंगे। ध्यान रहे कांग्रेस अब मोटे तौर पर दक्षिण भारत की ही पार्टी बन गई है। वहां तीन राज्यों में उसकी सरकार है और लगभग 40 फीसदी लोकसभा सांसद उधर से ही हैं।
सो, कांग्रेस ने पहले से डैमेज कंट्रोल का प्रयास शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने विजय की पार्टी से कहा है कि उसको राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार स्वीकार करना होगा। चेन्नई में नौ सितंबर को सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी पार्टियों की बैठक है। इसमें कांग्रेस नेता यह मुद्दा उठाएंगे। तमिलनाडु के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मणिक्कम टैगोर ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी के मुद्दे पर कोई कंप्रोमाइज नहीं हो सकता है। देखना दिलचस्प होगा कि इस बैठक में किस तरह से यह मुद्दा उठाया जाता है। गौरतलब है कि इस बैठक में प्रदेश के गठबंधन का नाम भी तय होगा। इससे पहले डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का नाम एसपीए यानी सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस था। इसी से मिलता जुलता नाम रखे जाने की ज्यादा संभावना है। नाम से ज्यादा ध्यान इस पर होगा कि राहुल गांधी की दावेदारी पर विजय की पार्टी क्या कहती है।
