निर्भया कांड के 14 साल के बाद दिल्ली में फिर युवाओं का आक्रोश दिखा। हजारों की संख्या में छात्र व युवा सड़कों पर निकले। बारिश, पुलिस की लाठी, आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारों की परवाह किए बगैर उन्होंने जंतर मंतर पर कब्जा किया। रविवार को पूरी रात वे वहां डटे रहे और सोमवार की सुबह संसद की ओर मार्च किया तो सरकार के हाथ पांव फूल गए। किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी संख्या में और इतने जज्बाती होकर युवा सरकार के खिलाफ आंदोलन करने निकलेंगे। पुलिस ने खूब लाठियां चलाईं और पिछले 14 साल में जितने आंसू गैस के गोले नहीं छोड़े गए होंगे उतने अकेले सोमवार, 20 जुलाई को छोड़े गए। इस आंदोलन में जो जोश और जज्बा था वह अद्भुत था। इसी तरह 2012 में निर्भया कांड के बाद युवा निकले थे। उन्होंने इंडिया गेट पर कब्जा कर लिया था और राष्ट्रपति भवन के लौह द्वार को झकझोर दिया था।
सोमवार, 20 जुलाई का आंदोलन इतना तीव्र और व्यापक था कि राहुल गांधी को भी चुप्पी तोड़नी पड़ी। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी या सोनम वांगचुक का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि सरकार अपने बच्चों पर लाठियां चला रही है। उन्होंने मोदी को अब तक का सबसे युवा विरोधी प्रधानमंत्री कहा। कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा कुछ दिन पहले जंतर मंतर पर धरने में भी पहुंचे थे और वांगचुक से मुलाकात की थी। इसके बावजूद कांग्रेस के इकोसिस्टम को इस आंदोलन पर भरोसा नहीं है। सोशल मीडिया में सक्रिय कांग्रेस का इकोसिस्टम अब भी इस आंदोलन को भाजपा का प्रॉक्सी आंदोलन बता रहा है। कांग्रेस से जुड़े लोगों के अलावा पत्रकारों और पूर्व पत्रकारों का एक बड़ा समूह है, जो मान रहा है कि भाजपा ने दूसरी तमाम चीजों से ध्यान हटाने के लिए एक योजना के तहत यह आंदोलन शुरू कराया है। असल में अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद से हर आंदोलन पर इस तरह के संदेह पैदा किए जाते हैं। किसी आंदोलन को सरकार साजिश बताती है तो किसी आंदोलन को विपक्ष साजिश बताता है।
परंतु सवाल है कि क्या सचमुच कॉकरोच जनता पार्टी औऱ सोनम वांगचुक का आंदोलन भाजपा द्वारा प्रायोजित है? कई लोग वांगचुक का एक वीडियो वायरल कर रहे हैं, जिसमें वे कह रहे हैं कि लद्दाख के उप राज्यपाल विनय सक्सेना के कहने पर वे सीजेपी के लोगों के संपर्क में आए थे। इस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि सीजेपी और वांगचुक का आंदोलन प्रायोजित है। तभी कांग्रेस के इकोसिस्टम के लोग कह रहे है कि सरकार को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से ध्यान हटाना है। सरकार को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर देश भर में उठ रहे सवालों से ध्यान हटाना है। सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों से ध्यान हटाना है। सरकार को एसआईआर के मुद्दे से ध्यान हटाना है। इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी को आगे करके विपक्ष के स्पेस में उसको घुसाया जा रहा है ताकि कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों को कमजोर किया जा सके। सोचें, कितने समझदार और दूरदर्शी लोग हैं! हर चीज में साजिश भांप लेते हैं! हर चीज में साजिश देखने वालों को इस आंदोलन में शामिल चार छह बड़े चेहरों को नहीं, बल्कि हजारों उन अनाम चेहरों को देखने की जरुरत है, जो अपने भविष्य की चिंता में हैं, जो अपने अंदर खदबदाते गुस्से को अभिव्यक्त करने के लिए इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। यह भी देखना चाहिए कि अभिजीत दीपके और वांगचुक जो मुद्दा उठा रहे हैं वह वास्तविक है या नहीं और उसके साथ देश के लोग कनेक्ट कर रहे हैं या नहीं। कांग्रेस से ज्यादा कांग्रेस की चिंता करने वाले ये लोग ही कांग्रेस के लिए असली संकट का कारण हैं।
