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कोयला घोटाले में रिहाई का सिलसिला

यूपीए दो की सरकार के खिलाफ वैसे तो भाजपा ने ए टू जेड घोटाले के आरोप लगाए थे। अंग्रेजी अल्फाबेट के सभी 26 लेटर्स से कोई न कोई घोटाला गिनाया जाता था। लेकिन कांग्रेस की हार के लिए जिन दो घोटालों को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है उनमें एक कोयला घोटाला है। पहले नंबर पर संचार घोटाले को रखा जा सकता है। देश के नियंत्रक व महालेखापरीक्षक यानी सीएजी ने बताया कि 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। हालांकि यह अनुमानित नुकसान था। इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत से सभी आरोपी बरी हो गए। बाद में सीबीआई हाई कोर्ट गई, जहां मामला लंबित है। सोचें, 16 साल हो चुके हैं। बहरहाल, दूसरा घोटाला कोल ब्लॉक आवंटन का था। इसमें तो संचार घोटाले से भी बड़ी रकम बताई गई थी। कहा गया था कि यह तीन लाख 30 हजार करोड़ रुपए का घोटाला है। लेकिन इस मामले में भी एक के बाद एक रिहाई चल रही है।

ताजा रिहाई पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत डॉक्टर मनमोहन सिंह का है। उनका नाम इस घोटाले में शामिल था। हालांकि केंद्र में एनडीए की सरकार आने के बाद 2014 में सीबीआई ने उनके मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन उसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया था। उसके 12 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसी क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया और मनमोहन सिंह को इस मामले में क्लीन चिट मिली। उनसे पहले पिछले कई सालों से कोयला घोटाले से जुड़े केस में अधिकारियों औऱ नेताओं की रिहाई का सिलसिला शुरू हो गया था। तत्कालीन कोयला सचिव के ऊपर भी इस मामले में शामिल होने के आरोप लगे थे। लेकिन वे भी इस मामले में बरी हो चुके हैं।

गौरतलब है कि सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार के कुल 52 मुकदमे दर्ज किए थे। करीब डेढ़ दशक बाद इनमें से 25 मामलों का निपटारा हो चुका है और किसी को सजा नहीं हुई है। अभी कोयला घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के 27 मामले दो अदालतों में लंबित हैं। उनकी हस्र भी वही होगा, जो पहले के 25 मामलों का हुआ है। बहरहाल, पिछले महीने जुलाई में कोयला घोटाले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने कांग्रेस के पूर्व सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर धनशोधन के मामले को खारिज कर दिया। इनके खिलाफ महाराष्ट्र में कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ा मामला चल रहा था। अदालत ने उसे खारिज कर दिया।

इससे पहले मई में एक विशेष अदालत ने एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड और चार अन्य को कोल ब्लॉक आवंटन के एक मामले में बरी कर दिया। इससे पहले मार्च में एक विशेष अदालत ने राठी स्टील्स के खिलाफ दर्ज मामले में आरोपपत्र में तमाम गड़बड़ियां बताई थीं। कोयला घोटाले के 19 मामलों में पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता का नाम था। वे भी लगभग सभी केसेज में बरी हो चुके हैं। सुनवाई की स्थिति यह है कि डेढ़ दशक के बाद मामले अभी आरोप तय करने की स्थिति में पहुंचे हैं। जून में भाजपा सांसद नवीन जिंदल को विशेष अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेने की सुनवाई का समन किया था, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो मामले अभी चल रहे हैं उनका क्या हस्र होना है।

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