कॉकरोच जनता पार्टी के ऊपर इस बात के आरोप लगते रहे हैं कि उसके निशाने पर सिर्फ भाजपा शासित राज्य है। जब से सीजेपी के नेताओं ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ तब से यह दिखता है कि इसके नेता ज्यादा मुखर होकर उन्हीं राज्यों में काम कर रहे हैं, जहां भाजपा की सरकार है। महाराष्ट्र और राजस्थान में सीजेपी के नेताओं ने खूब विवाद पैदा किया। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि उनके ऊपर अपने को तटस्थ दिखाने का दबाव बना है।
इस दबाव के कारण ही सीजेपी के नेता कांग्रेस शासित कर्नाटक, आम आदमी पार्टी के शासन वाले पंजाब और झारखंड मुक्ति मोर्चा के शासन वाले झारखंड भी गए। लेकिन वहां उनको एक भी स्कूल में वैसी कमी नहीं दिखी, जैसी राजस्थान और महाराष्ट्र में दिखी। तीनों राज्यों के बारे में सीजीपे ने ओके रिपोर्ट दी। यह भी कहा कि इन राज्यों में उनका विरोध नहीं हुआ और उन्होंने सरकार के सामने जो मुद्दे उठाए उनको सुन कर उस पर अमल करने का आश्वासन दिया गया। हालांकि भाजपा के नेता और सोशल मीडिया में उनका इकोसिस्टम इससे संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि यह एक दिखावा था ताकि बाद में कहा जा सके कि वे गैर भाजपा शासित राज्यों में भी गए हैं।
