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चुनावी राज्यों में पैसा बांटने की होड़

यह बड़ा सवाल है कि क्या चुनाव जीतने के लिए कुछ भी वादा किया जा सकता है? जो सरकार में है वह खुले दिल से खजाना लुटा रहा है और जो विपक्ष में है वह उससे ज्यादा खुले दिल से खजाना लुटाने का ऐलान कर रहा है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इसकी नई मिसाल बनाई है। भाजपा ने ऐलान किया है कि उसकी सरकार बनी तो हर महीने महिलाओं को तीन हजार रुपए देगी। ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं सामान्य और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को डेढ़ बजार और एससी व एसटी समुदाय की महिलाओं को 17 सौ रुपए महीना देने का ऐलान किया है। उसके जवाब में भाजपा ने राशि सीधे दोगुनी कर दी है।

अब सोचें, पश्चिम बंगाल की करीब 10 करोड़ आबादी में से अगर दो करोड़ महिलाओं को भी तीन तीन हजार रुपए हर महीने दिए जाते हैं तो साल में सरकार को 72 हजार करोड़ रुपए की जरुरत होगी। महाराष्ट्र जैसा राज्य डेढ़ हजार रुपए महीना दे रहा है और उसमें उसकी हालत ऐसी हो गई है कि सारी बड़ी योजनाओं में देरी हो रही है। भाजपा ने बेरोजगार युवाओं को भी तीन हजार रुपया महीना देने का ऐलान किया है। हालांकि भाजपा के इस वादे पर बंगाल में लोगों को यकीन नहीं ही होगा क्योंकि दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी ने महिला दिवस पर आठ मार्च 2025 से मुख्यमंत्री महिला सम्मान राशि देने का ऐलान किया था, जो एक साल बीत जाने के बाद भी नहीं दिया जा रहा है। फिर भी भाजपा जैसी पार्टी, जिसके नेता नरेंद्र मोदी ने इस तरह की योजनाओं को मुफ्त की रेवड़ी कहा था और .यह भी कहा था कि इससे देश तबाह हो जाएगा, वह पार्टी ऐसे अनाप शनाप वादे कर रही है।

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