कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सैद्धांतिक रूप से इस बात पर सहमत हो गए हैं कि दोनों मिल कर उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ेंगे। पिछली बार दोनों पार्टियां अलग अलग लड़ी थीं और कांग्रेस सिर्फ दो सीट पर सिमट गई। सपा की सीटें 2017 के 47 से बढ़ कर 111 हो गईं। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों साथ आए तो दोनों को फायदा हुआ। कांग्रेस एक से बढ़ कर छह हो गई तो सपा पांच से बढ़ कर 36 हो गई। उसके बाद से ही दोनों पार्टियां के तालमेल की चर्चा हो रही थी। अब कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से बात हुई है, जिसमें गठबंधन का फैसला हो गया है।
इसके बाद ही राहुल गांधी उत्तर प्रेदश के कांग्रेस सांसदों से मिले। प्रयागराज में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में जाने से पहले राहुल ने अपने सांसदों से मुलाकात की। सबकी राय यह थी कि कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे की बातचीत जल्दी शुरू कर देनी चाहिए। अभी चुनाव में भले छह महीने से ज्यादा का समय है। लेकिन अगर तालमेल की बात पहले हो जाएगी तो दोनों पार्टियों को उम्मीदवारों को तैयारी करने का ज्यादा समय मिलेगा। कांग्रेस सांसदों और अन्य नेताओं ने कहा कि सीटों का बंटवारा भी आसान नहीं है, इसमें समय लगेगा। कांग्रेस सीटों की संख्या से ज्यादा क्वालिटी सीटों की मांग कर रही है। सपा के असर वाले इलाके में भी कांग्रेस को सीट चाहिए। 2017 के चुनाव में कांग्रेस को ज्यादातर ऐसी सीटें मिली थीं, जो गठबंधन के वोट से जीतने वाली नहीं थीं। जहां तक सीटों की संख्या का सवाल है कि कांग्रेस एक सौ सीट चाहती है और अखिलेश यादव हर लोकसभा में एक सीट के फॉर्मूले के हिसाब से 80 सीटों से मोलभाव शुरू करेंगे।
